Site icon Dainik Savera Times

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 29 अप्रैल 2025

Hukamnama : गूजरी महला ४ ॥ होहु दइआल मेरा मनु लावहु हउ अनदिनु राम नामु नित धिआई ॥ सभि सुख सभि गुण सभि निधान हरि जितु जपिऐ दुख भुख सभ लहि जाई ॥१॥ मन मेरे मेरा राम नामु सखा हरि भाई ॥ गुरमति राम नामु जसु गावा अंति बेली दरगह लए छडाई ॥१॥ रहाउ ॥ तूं आपे दाता प्रभु अंतरजामी करि किरपा लोच मेरै मनि लाई ॥ मै मनि तनि लोच लगी हरि सेती प्रभि लोच पूरी सतिगुर सरणाई ॥२॥ माणस जनमु पुंनि करि पाइआ बिनु नावै ध्रिगु ध्रिगु बिरथा जाई ॥ नाम बिना रस कस दुखु खावै मुखु फीका थुक थूक मुखि पाई ॥३॥ जो जन हरि प्रभ हरि हरि सरणा तिन दरगह हरि हरि दे वडिआई ॥ धंनु धंनु साबासि कहै प्रभु जन कउ जन नानक मेलि लए गलि लाई ॥४॥४॥

Hukamnama अर्थ : हे मेरे मन! परमात्मा का नाम मेरा मित्र है मेरा भाई है। मैं गुरू की शिक्षा की बरकति से परमात्मा के सिफत सालाह के गीत गाता हूँ। आखिरी वक्त पर परमात्मा का नाम ही मददगार बनता है, प्रभू की हजूरी में नाम ही सुर्खरू करवाता है।1। रहाउ। हे प्रभू! मेरे पर दयावान होवो, मेरा मन (अपने चरणों में) जोड़े रखो, मैं हर समय सदा तेरा ही नाम सिमरता रहूँ। हे मेरे मन! सारे सुख सारे खजाने उस परमात्मा के ही पास हैं, जिसका नाम जपने से सारे दुख (दूर हो जाते हैं), (माया की) सारी भूख उतर जाती है।1।

हे हरी! तू खुद ही सब दातें देने वाला है, तू खुद ही (सबका) मालिक है, तू सबके दिल की जानने वाला है। तूने खुद ही मेहर करके मेरे मन में अपनी भक्ति की चाहत पैदा की हुई है। हे भाई! मेरे मन में मेरे हृदय में परमात्मा के साथ मिलाप की चाहत पैदा हुई पड़ी है। परमात्मा ने मुझे सतिगुरू की शरण में ला कर मेरी चाहत पूरी कर दी है।2। हे भाई! मानस जनम बड़ी किस्मत से मिलता है, पर परमात्मा के नाम सिमरन के बिना (मानस जन्म) धिक्कार-योग्य हो जाता है, नाम के बिना व्यर्थ चला जाता है। मनुष्य प्रभू का नाम भुला के दुनिया के अनेकों किस्म के पदार्थ खाता रहता है, दुख ही सहेड़ता है, मुंह से फीके बोल बोलता रहता है, दुनिया इसे धिक्कारें ही डालती है।3। हे भाई! जो मनुष्य परमात्मा की शरण पड़े रहते हैं, उनको परमात्मा अपनी हजूरी में आदर मान देता है। हे नानक! परमात्मा अपने सेवक को ‘धन्य धन्य’ कहता है, ‘शाबाश’ कहता है, अपने सेवक को अपने गले से लगा के अपने चरणों में जोड़ लेता है।4।4।

Exit mobile version