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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 19 फरवरी 2026

Ajj da hukamnama

Ajj da hukamnama

Hukamnama : बिलावल की वार महला ४ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सलोक मः ४ ॥ हरि उतमु हरि प्रभु गाविआ करि नादु बिलावलु रागु ॥ उपदेसु गुरू सुणि मंनिआ धुरि मसतकि पूरा भागु ॥ सभ दिनसु रैणि गुण उचरै हरि हरि हरि उरि लिव लागु ॥ सभु तनु मनु हरिआ होइआ मनु खिड़िआ हरिआ बागु ॥ अगिआनु अंधेरा मिटि गइआ गुर चानणु गिआनु चरागु ॥ जनु नानकु जीवै देखि हरि इक निमख घड़ी मुखि लागु ॥१॥

अर्थ : अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई! (पूर्व कर्मों के अनुसार) जिस मनुख के मस्तक पर मूल रूप से ही पूर्ण भाग्य है, (जिस के हिर्दय में पूर्ण भले संस्कारो का लेख उघाड़ता है) उस ने गुरु का शब्द-रूप बिलावल राग उच्चार कर सब स्रेशठ परमात्मा के गुण गए हैं, उस ने सतगुरु का उपदेश सुन के हिर्दय में बसाया है। वह मनुख सारा दिन और साडी रात (आठो पहर) परमात्मा के सुन गता है (क्योंकि उस के) हिर्दय में परमात्मा के याद की लगन लगी रहती है। उस का सारा तन सारा मन हरा भरा हो जाता है (आत्मिक जीवन के रस से भर जाता है), उस का मन (ऐसे) खिल जाता है (जैसे) हरा भरा कोई बाग़ है। गुरु द्वारा दी हुई आत्मिक जीवन की सूझ (उस के अंदर, मानो) कोई दीपक रौशनी कर देता है (जिस की बरकत से उस के अंदर) आत्मिक जीवन की तरफ बे-समझी का अंधकार मिट जाता है। गुरु नानक जी कहते हैं, हे हरी! (तेरा) दास नानक (ऐसे गुरुमुख मनुख को) देख के आत्मिक जीवन हासिल कर सकता है ( और, चाहता है की) चाहे एक पल दर्शन हो पर हो जाये।१।

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