Last Updated: September 21, 2026

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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 21 फरवरी 2026

February 21, 2026

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 21 फरवरी 2026

Hukamnama Sahib: गूजरी महला ५ ॥ कबहू हरि सिउ चीतु न लाइओ ॥ धंधा करत बिहानी अउधहि गुण निधि नामु न गाइओ ॥१॥ रहाउ॥कउडी कउडी जोरत कपटे अनिक जुगति करि धाइओ ॥ बिसरत प्रभ केते दुख गनीअहि महा मोहनी खाइओ ॥१॥करहु अनुग्रहु सुआमी मेरे गनहु न मोहि कमाइओ ॥ गोबिंद दइआल क्रिपाल सुख सागर नानक हरि सरणाइओ ॥२॥१६॥२५॥

Hukamnama Sahib अर्थ: (हे भाई! माया के मोह में फंसा जीव) कभी अपना मन परमात्मा (के चरणों) से नहीं जोड़ता। (माया की खातिर) दौड़-भाग करते हुए (इसकी) उम्र गुजर जाती है सारे गुणों के खजाने परमात्मा का नाम नहीं जपता।1। रहाउ।ठगी से एक-एक कौड़ी करके माया एकत्र करता रहता है अनेक ढंग-तरीके बरत के माया की खातिर दौड़ता फिरता है। परमात्मा का नाम भुलाने के कारण इसे अनेक ही दुख आ घेरते हैं। मन को मोह लेने वाली प्रबल माया इसके आत्मिक जीवन को खा जाती है।1।हे नानक! (कह:) हे गोबिंद! हे दयालु! हे कृपालु! हे सुखों के समुंदर! हे हरि! मैं तेरी शरण आया हूँ। हे मेरे मालिक! मेरे पर मेहर कर, मेरे किए कर्मों की तरफ ध्यान ना करना।2।16।25।

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