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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 2 अगस्त 2025

Ajj da Hukamnama

Ajj da Hukamnama

Hukamnama : वडहंसु महला ३ ॥ ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥ आपे सचा बखसि लए फिरि होइ न फेरा राम ॥ फिरि होइ न फेरा अंति सचि निबेड़ा गुरमुखि मिलै वडिआई ॥ साचै रंगि राते सहजे माते सहजे रहे समाई ॥ सचा मनि भाइआ सचु वसाइआ सबदि रते अंति निबेरा ॥ नानक नामि रते से सचि समाणे बहुरि न भवजलि फेरा ॥१॥

अर्थ: हे मेरे मन! जगत (का मोह जीव के लिए)जनम मरण (का फ़ेर लाता) है, आखिर सदा कायम रहने वाले परमात्मा में जुरने से (जनम मरण के फ़ेर ) का अंत हो जाता है। जिस मनुख को सदा थिर रहने वाला प्रभु ही बख्सता है उस को जगत में फिर फिर नहीं आना पडता। उस को दोबारा जनम मरण का फेर नहीं मिलता। सदा थिर हरी नाम में लिट हो कर के उस के जनम मरण का आखिर खात्मा हो जाता है, गुरु की सरन में आ के उस को ( लोक परलोक में इज्जत मिलती है) जो मनुख सदा थिर हरी के प्रेम में रंग जाते है, वेह आत्मिक अडोलता में मस्त रहते हैं, आत्मिक अडोलता के द्वारा परमात्मा में लीं हो जाते हैं। है मेरे मन! जिस मनुख को सदा थिर रहने वाला प्रभु मन मैं प्यारा लगने लग जाता है, जो परमात्मा को अपने हिरदे में बसा लेते हैं, जो गुरु के रंग में रंग जाते हैं, उन का जनम मरण आखिर ख़तम हो जाता है। गुरू नानक जी कहते हैं, है नानक! प्रभु के नाम रंग में रंगे हुए मनुख प्रभु में लीनहो जाते हैं, उन को संसार समुन्दर में बार बार नहीं आना पड़ता।1।

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