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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 31 अक्टूबर 2025

Hukamnama: धनासरी महला ५ ॥ फिरत फिरत भेटे जन साधू पूरै गुरि समझाइआ ॥ आन सगल बिधि कांमि न आवै हरि हरि नामु धिआइआ ॥१॥
ता ते मोहि धारी ओट गोपाल ॥ सरनि परिओ पूरन परमेसुर बिनसे सगल जंजाल ॥ रहाउ ॥
सुरग मिरत पइआल भू मंडल सगल बिआपे माइ ॥ जीअ उधारन सभ कुल तारन हरि हरि नामु धिआइ ॥२॥
नानक नामु निरंजनु गाईऐ पाईऐ सरब निधाना ॥ करि किरपा जिसु देइ सुआमी बिरले काहू जाना ॥३॥३॥२१॥

हुकमनामा साहिब – हिंदी अर्थ

धनासरी महला ५ ॥ इधर-उधर भ्रमण करते हुए जब मेरा साधु-महापुरुष (गुरु) से साक्षात्कार हुआ तो पूर्ण गुरु ने मुझे उपदेश दिया कि अन्य समस्त विधियों काम नहीं आनी, इसलिए हरि-नाम का ही ध्यान-मनन किया है॥ १ ॥
इसलिए मैंने ईश्वर का ही सहारा लिया है। मैं तो पूर्ण परमेश्वर की शरण में आ गया हूँ और मेरे सभी कष्ट जंजाल नाश हो गए हैं।॥ रहाउ॥
स्वर्गलोक, मृत्युलोक, पाताललोक एवं समूचे भूमण्डल में माया व्यापक है। अपनी आत्मा का उद्धार करने के लिए एवं अपनी समस्त वंशावलि को भवसागर में से पार करवाने के लिए हरि-नाम का ही ध्यान करना चाहिए॥२॥
हे नानक ! यदि मायातीत प्रभु-नाम का स्तुतिगान किया जाए तो सर्व सुखों के भण्डार प्राप्त हो जाते हैं। इस रहस्य को किसी विरले पुरुष ने ही समझा है, जिसे जगत का स्वामी प्रभु कृपा करके नाम की देन प्रदान करता है॥ ३॥ ३॥

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