Site icon Dainik Savera Times

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 1 मई 2026

Hukamnama 1 May 2026

Hukamnama 1 May 2026

Hukamnama : रागु सोरठि बाणी भगत रविदास जी कीੴ सतिगुर प्रसादि ॥दुलभ जनमु पुंन फल पाइओ बिरथा जात अबिबेकै ॥ राजे इंद्र समसरि ग्रिह आसन बिनु हरि भगति कहहु किह लेखै ॥१॥ न बीचारिओ राजा राम को रसु ॥ जिह रस अन रस बीसरि जाही ॥१॥ रहाउ ॥ जानि अजान भए हम बावर सोच असोच दिवस जाही ॥ इंद्री सबल निबल बिबेक बुधि परमारथ परवेस नही ॥२॥ कहीअत आन अचरीअत अन कछु समझ न परै अपर माइआ ॥ कहि रविदास उदास दास मति परहरि कोपु करहु जीअ दइआ ॥३॥३॥

अर्थ : राग सोरठि में भगत रविदास जी की बाणी।अकाल पुरख एक है और सतिगुरू की कृपा से मिलता है।यह मनुष्या जन्म बहुत मुश्किल से मिलता है, (पिछले किए) भले कार्यों के फल स्वरूप हमें मिला है, परन्तु हमारी अज्ञानता में यह व्यर्थ ही जा रहा है, (हमने कभी सोचा ही नहीं कि) अगर प्रभू की बंदगी से वंचित रहें तो (देवतायों के) राजे इन्द्र के स्वर्ग के महल भी किसी काम के नहीं हैं ॥१॥(हम माया-धारी जीवों ने) जगत-प्रभू परमात्मा के नाम के उस आनंद को कभी नहीं विचारा, जिस आनंद की बरकत से (माया के) और सारे चस्के दूर हो जाते हैं ॥१॥ रहाउ ॥

(हे प्रभू!) जानते बुझते हुए ही हम पागल और मुर्ख बने हुए हैं, हमारी उम्र के दिन (माया की ही) अच्छी बुरी विचारों में बीत रहे हैं, हमारी काम-वाश़ना बढ रही है, विचार-शक्ति घट रही है, इस बात की हमने कभी सोच ही नहीं की कि हमारी सब से बड़ी ज़रुरत क्या है ॥२॥ हम कहते कुछ हैं और करते कुछ ओर हैं, माया इतनी बलवान हो रही है कि हमें (अपनी मुर्खता की) समझ ही नहीं पड़ती। (हे प्रभू!) तेरा दास रविदास कहता है – मैं अब इस (मुर्ख-पुने) से निरलेप हो गया हूँ, (मेरी अज्ञानता पर) गुस्सा ना करना और मेरी आत्मा पर मेहर करना ॥३॥३॥

Exit mobile version