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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 11 फरवरी 2026

Hukamnama today

Hukamnama today

Hukamnama today: धनासरी महला १ घरु २ असटपदीआ

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥ अम्रितु संत चुगहि नही दूरे ॥ हरि रसु चोग चुगहि प्रभ भावै ॥ सरवर महि हंसु प्रानपति पावै ॥१॥ किआ बगु बपुड़ा छपड़ी नाइ ॥ कीचड़ि डूबै मैलु न जाइ ॥१॥ रहाउ ॥ रखि रखि चरन धरे वीचारी ॥ दुबिधा छोडि भए निरंकारी ॥ मुकति पदारथु हरि रस चाखे ॥ आवण जाण रहे गुरि राखे ॥२॥ सरवर हंसा छोडि न जाइ ॥ प्रेम भगति करि सहजि समाइ ॥ सरवर महि हंसु हंस महि सागरु ॥ अकथ कथा गुर बचनी आदरु ॥३॥ सुंन मंडल इकु जोगी बैसे ॥ नारि न पुरखु कहहु कोऊ कैसे ॥ त्रिभवण जोति रहे लिव लाई ॥ सुरि नर नाथ सचे सरणाई ॥४॥ आनंद मूलु अनाथ अधारी ॥ गुरमुखि भगति सहजि बीचारी ॥ भगति वछल भै काटणहारे ॥ हउमै मारि मिले पगु धारे ॥५॥ अनिक जतन करि कालु संताए ॥ मरणु लिखाइ मंडल महि आए ॥ जनमु पदारथु दुबिधा खोवै ॥ आपु न चीनसि भ्रमि भ्रमि रोवै ॥६॥ कहतउ पड़तउ सुणतउ एक ॥ धीरज धरमु धरणीधर टेक ॥ जतु सतु संजमु रिदै समाए ॥ चउथे पद कउ जे मनु पतीआए ॥७॥ साचे निरमल मैलु न लागै ॥ गुर कै सबदि भरम भउ भागै ॥ सूरति मूरति आदि अनूपु ॥ नानकु जाचै साचु सरूपु ॥८॥१॥

Hukamnama today अर्थ: राग धनासरी, घर २ में गुरु नानक देव जी की आठ-बंदो वाली बाणी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। गुरु (मानो) एक सागर (है जो प्रभु की सिफत सलाह के) रत्नों से लाबा-लब भरा हुआ है। गुरमुख सिख (उस सागर में) aatimik जीवन dene वाली खुराक (प्राप्त करते हैं जैसे हंस मोती) चुगते हैं, (और गुरु से) दूर नहीं रहते। प्रभु की कृपा अनुसार संत-हंस हरी-नाम रस (की) चोग चुगते हैं। (गुरसिख) हंस (गुरु-) सरोवर में (टिके रहते हैं, और) जिंद के मालिक प्रभु को ढूंढ़ लेते हैं।१। बेचारा बगुला तालाब में किस लिए नहाता है? (कुछ नहीं कमाता, बलिकी, तालाब में नहा कर) कीचड़ में डूबता है, (उस की यह) मैल दूर नहीं होती (जो मनुख गुरु-सागर को छोड़ कर देवी देवता आदि और और सहारे खोजते हैं वह, मानो तालाब में ही नहा रहे हैं। वहाँ वह और माया-मोह की मैल खिंच लेते हैं।१।रहाउ।

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