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सावन में कब निकाली जाएगी कांवड़ यात्रा? जानें किस दिन होगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Kanwar Yatra 2026

Kanwar Yatra 2026: सावन के साथ शुरू होगी का माहौल बन जाता है। इसी दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, गोमुख समेत विभिन्न पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। केसरिया वस्त्र धारण किए कांवड़िए “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ शिवभक्तों की आस्था की सबसे बड़ी यात्रा

श्रावण मास के आगमन के साथ ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति का माहौल बन जाता है। इसी दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, गोमुख समेत विभिन्न पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। केसरिया वस्त्र धारण किए कांवड़िए “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ कई किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से होगी। इसी दिन से कांवड़ यात्रा भी आरंभ मानी जाएगी और देशभर से शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए पवित्र तीर्थों की ओर प्रस्थान करेंगे।

Kanwar Yatra 2026
Kanwar Yatra 2026

कांवड़ यात्रा प्रारंभ: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
कांवड़ यात्रा समापन: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
यात्रा की अवधि: 13 दिन

जलाभिषेक की सही तारीख नोट करें

कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने साथ लाए गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त, मंगलवार को पड़ रही है। इसी दिन देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का आयोजन होगा।

कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें पवित्र गंगाजल अर्पित किया। तभी से सावन माह में गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।

मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक कांवड़ यात्रा पूरी कर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सलाह

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि धार्मिक यात्रा सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरी की जा सके।

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