
Karwa Chauth Vrat Rules: करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए खास त्योहार है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। शाम को पूजा करने के बाद सभी को चांद निकलने का इंतजार रहता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। लेकिन कई बार बारिश या आसमान में बादल होने के कारण चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में महिलाओं के मन में सवाल आता है कि अगर चांद नजर न आए तो व्रत कैसे खोलें? आइए जानते हैं कुछ आसान उपाय…
1. भगवान शिव की पूजा करें
अगर करवा चौथ की रात चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो आप भगवान शिव की पूजा कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवजी के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। ऐसे में घर में भगवान शिव की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और चंद्रदेव को याद करें। इसके बाद अपने घर की परंपरा के अनुसार व्रत खोल सकती हैं।
2. चंद्रमा की तस्वीर रखकर करें पूजा
अगर आसमान में चांद नजर नहीं आ रहा है, तो कुछ परिवारों में चंद्रमा की तस्वीर रखकर पूजा करने की परंपरा है। इसके लिए एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और चंद्रमा की तस्वीर रखें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा करें। इस दौरान ‘ॐ चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप भी कर सकती हैं। पूजा पूरी होने के बाद अपने परिवार की मान्यता के अनुसार व्रत खोलें।
3. चंद्रोदय के समय का करें इंतजार
कई बार चांद आसमान में निकल आता है, लेकिन बादलों के कारण दिखाई नहीं देता। ऐसे में अपने शहर में चांद निकलने के समय का पता करें और थोड़ा इंतजार करें। अगर तय समय के बाद भी चांद नजर नहीं आता, तो परिवार के बड़े-बुजुर्गों से सलाह ले सकती हैं। अलग-अलग परिवारों में इस स्थिति में व्रत खोलने के तरीके अलग हो सकते हैं।
4. वीडियो कॉल से देख सकती हैं चांद
अगर आपके परिवार के लोग किसी दूसरे शहर में रहते हैं और वहां चांद दिखाई दे रहा है, तो आप उनसे वीडियो कॉल कर सकती हैं। कुछ लोग वीडियो या चंद्रमा की तस्वीर देखकर भी पूजा करते हैं। हालांकि, यह तरीका हर परिवार की धार्मिक परंपरा में मान्य नहीं है। इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार फैसला लें।
करवा चौथ 2026: चांद निकलने का समय
करवा चौथ पर पूजा और चंद्रमा के दर्शन का खास महत्व होता है। चांद निकलने का समय हर शहर में अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपने शहर के पंचांग या भरोसेमंद धार्मिक कैलेंडर में चंद्रोदय का समय जरूर देख लें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)