Site icon Dainik Savera Times

Kedarnath Yatra: गौरीकुंड से शुरू होती है बाबा भोलेनाथ के दर्शन की पवित्र यात्रा, जानें इसकी महिमा और मान्यताएं

Kedarnath Yatra : केदारनाथ धाम की यात्रा करने की सोच रहे हैं तो यह जानना बेहद जरूरी है कि यह यात्रा कहां से शुरू होती है और किन परंपराओं का पालन करना आवश्यक माना गया है। केदारनाथ यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित गौरीकुंड से होती है। यह स्थान धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि केदारनाथ के दर्शन से पहले गौरीकुंड में स्नान करना पुण्य प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।

गौरीकुंड की महिमा और पौराणिक कथा

गौरीकुंड को देवी गौरी का तालाब भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यही वह स्थान है जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और विवाह के लिए राजी हुए। गौरीकुंड के समीप माता गौरा का प्राचीन मंदिर भी है, जहां भक्त दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

गौरीकुंड के तप्त और शीतल जल का रहस्य

गौरीकुंड में दो प्रकार के कुंड हैं। एक तप्त कुंड है, जहां पानी का तापमान 53 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। वहीं दूसरा कुंड सामान्य तापमान (23 डिग्री सेल्सियस) का है। यह माना जाता है कि तप्त कुंड का जल शरीर के दोषों को दूर करता है और शुद्धि प्रदान करता है।

क्यों जरूरी है स्नान?

मान्यता है कि केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों को पहले गौरीकुंड में स्नान कर मां पार्वती का आशीर्वाद लेना चाहिए। ऐसा करने से ही बाबा भोलेनाथ के दर्शन सार्थक होते हैं और व्यक्ति अपने पापों से मुक्त होकर पुण्य का भागी बनता है। कहा जाता है कि मां पार्वती की कठोर साधना के कारण इस पवित्र कुंड की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया था कि मेरे दर्शन से पहले लोग इस कुंड में स्नान कर पवित्र होंगे।

Exit mobile version