वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पाप मिटते हैं, भय दूर होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और सौभाग्य मिलता है। आइए जानते है वरूथिनी एकादशी की तिथि और पूजा मुहूर्त के बारे में:
वरूथिनी एकादशी तिथि 2023
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 अप्रैल दिन शनिवार को रात 08 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 16 अप्रैल दिन रविवार को शाम 06 बजकर 14 मिनट तक है. उदयातिथि के आधार पर वरूथिनी एकादशी का व्रत 16 अप्रैल रविवार को रखा जाएगा.
3 शुभ योगों में है वरूथिनी एकादशी
16 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी वाले दिन प्रात:काल से शुक्ल योग है, जो देर रात 12:13 बजे तक है. उसके बाद से ब्रह्म योग है. यह पारण के दिन हैं. इन दो शुभ योगों के अलावा त्रिपुष्कर योग पारण वाले दिन 17 अप्रैल को प्रात: 04 बजकर 07 मिनट से सुबह 05 बजकर 54 मिनट तक है. व्रत के दिन शतभिषा नक्षत्र है. व्रत के दिन का अभिजित मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक है.
वरूथिनी एकादशी पूजा मुहूर्त 2023
वरूथिनी एकादशी वाले दिन सुबह 07:32 बजे से लेकर दोपहर 12:21 बजे तक शुभ समय है. इसमें सुबह 09:08 बजे से सुबह 10:45 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त और सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त है. इन मुहूर्त में आप एकादशी व्रत की पूजा कर सकते हैं. दोपहर में शुभ-उत्तम मुहूर्त 01:58 बजे से 03:34 बजे तक है.
वरूथिनी एकादशी पारण समय 2023
जो लोग 16 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी का व्रत रखेंगे, वे 17 अप्रैल सोमवार को व्रत का पारण कर सकेंगे. वरूथिनी एकादशी व्रत के पारण का समय सुबह 05 बजकर 54 मिनट से सुबह 08 बजकर 29 मिनट तक है. इस दिन द्वादशी तिथि का समापन दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर होगा.
वरूथिनी एकादशी पूजा
व्रत के दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करते हैं. राजा मांधाता ने मथुरा में जाकर भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा की थी, तब उनको दोबारा से अच्छा शरीर प्राप्त हुआ था. इससे व्यक्ति के अंदर का डर समाप्त होता है. मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है.
