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Magh Mela Snan 2026: मौनी अमावस्या पर आज होगा तीसरा प्रमुख स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

Magh Mela Snan 2026

Magh Mela Snan 2026

Magh Mela Maun Amavasya Snan 2026: प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 के अंतर्गत आज तीसरा प्रमुख स्नान पर्व मनाया जा रहा है। मौनी अमावस्या के अवसर पर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को स्नान और दान के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर गंगा का जल अमृत तुल्य हो जाता है। इसी विश्वास के चलते माघ माह में संगम तट पर लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालु भाग लेने पहुंचते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा और भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा।

मौनी अमावस्या स्नान का धार्मिक महत्व

माघ मेले के सभी स्नानों में मौनी अमावस्या का स्नान सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या को ‘माघी अमावस्या’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखने से आत्मिक शुद्धि होती है और मन को विशेष शांति मिलती है।

मौनी अमावस्या 2026: स्नान और दान के शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि आरंभ: 18 जनवरी 2026, रात 12:03 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 19 जनवरी 2026, रात 1:21 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:53 बजे तक

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 10:14 बजे से 19 जनवरी सुबह 7:14 बजे तक

इन शुभ योगों में स्नान, दान और पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।

माघ मेले का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज वह पावन भूमि है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इसी कारण यहां किए गए स्नान-दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। लगभग 45 दिनों तक चलने वाले माघ मेले में श्रद्धालु तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से अपने पाप कर्मों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, माघ माह में गंगा स्नान करने से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। इस दौरान पूजा-पाठ, यज्ञ, जप और हवन करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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