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Magh Month 2026: इस दिन से शुरू होगा माघ मास, जानें क्या है धार्मिक महत्व और नियम

Magh Month 2026

Magh Month 2026

Magh Month 2026 Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को जप, तप, व्रत और दान के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इसी पावन महीने में प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेला और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। धार्मिक विश्वासों के अनुसार, माघ मास में देवता देवलोक से पृथ्वी पर आकर संगम के पवित्र जल में स्नान करते हैं, जिससे यह क्षेत्र विशेष रूप से पवित्र हो जाता है।

कब से कब तक रहेगा माघ मास 2026 में

वर्ष 2026 में माघ मास की शुरुआत 4 जनवरी से होगी और यह 1 फरवरी 2026 तक रहेगा। इस पूरे समय को भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।

भगवान विष्णु की कृपा का विशेष समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीहरि माघ मास में नियमपूर्वक किए गए स्नान, व्रत और साधना से अत्यंत प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि इस मास में संगम तट पर किया गया स्नान भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाने वाला होता है। यदि संभव हो, तो इस दौरान कम से कम एक बार संगम स्नान अवश्य करना चाहिए।

कम समय में भी मिल सकता है पूरा पुण्य

यदि कोई श्रद्धालु पूरे माघ मास में कल्पवास या संगम स्नान नहीं कर पाता, तो मान्यता है कि तीन दिन या एक दिन भी श्रद्धा और नियम के साथ जप-तप, व्रत और साधना करने से पूरे महीने का पुण्य फल प्राप्त हो सकता है।

माघ मास में आने वाले प्रमुख पर्व

माघ मास में सूर्य उत्तरायण रहते हैं और इस दौरान कई बड़े धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं। मास की शुरुआत में सकट चौथ, लोहड़ी और मकर संक्रांति जैसे पर्व आते हैं। वहीं उत्तरार्ध में मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी, भानु सप्तमी, शीतला षष्ठी, षटतिला एकादशी, जया एकादशी और भीमाष्टमी जैसे व्रत-त्योहार पड़ते हैं। माघ मास का समापन माघी पूर्णिमा के दिन होता है।

माघ मास में क्या करें

–पूरे श्रद्धा-भाव से भगवान विष्णु की आराधना करें।
–प्रतिदिन गंगा स्नान करें या स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
–भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य मंत्र का जाप करें।
–शिव पूजा करें और मंगलवार व गुरुवार के व्रत रखें।
–अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र और धन का दान करें।

माघ मास में किन बातों से बचें

–तामसिक भोजन और आदतों से दूर रहें।
–मूली का सेवन न करें।
–किसी से विवाद या कटु वचन न बोलें।
–दिन में सोने से बचें।
–कल्पवास कर रहे हों तो दिन में केवल एक बार भोजन करें।
–कोई सहायता मांगने आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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