Magh Month Snan News : स्नान-ध्यान और तपश्चर्या के माध्यम से जीवन को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा से भरने वाला पवित्र माघ मास रविवार से प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना आत्मशुद्धि, संयम और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी या पूर्णिमा तक प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
काशी और प्रयागराज में माघ स्नान का विशेष महत्व
धार्मिक दृष्टि से काशी में गंगा स्नान और प्रयागराज में गंगा या त्रिवेणी संगम में स्नान को सबसे अधिक फलदायी बताया गया है। इसी कारण पौष पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार को इन तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग तड़के सुबह से ही गंगा घाटों पर पहुंच गए और पुण्य सलिला में आस्था की डुबकी लगाकर स्वास्थ्य, सुख और कल्याण की कामना की।
माघ मास में स्नान और संयम से मिलता है विशेष पुण्य
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष और श्रीकाशी विद्वत परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय बताते हैं कि माघ मास में नियमपूर्वक स्नान और संयमित जीवन अपनाने से व्यक्ति का जीवन सरल, सुखमय और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण हो जाता है। उनके अनुसार इस मास की साधना से न केवल सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं, बल्कि पारलौकिक यानी आध्यात्मिक लाभ भी जीवन में प्राप्त होते हैं।
-मकर संक्रांति – 14 जनवरी,बुधवार
-मौनी अमावस्या – 18 जनवरी, रविवार
-बसंत पंचमी – 23 जनवरी, शुक्रवार
-माघी पूर्णिमा – 01 फरवरी, रविवार
-महाशिवरात्रि – 15 फरवरी, रविवार
त्रिकाल स्नान और भगवान विष्णु की उपासना का विधान
धर्मग्रंथों में माघ मास के दौरान त्रिकाल स्नान (सुबह, दोपहर और शाम), संयमित जीवन, भूमि पर शयन और भौतिक सुख-साधनों के त्याग का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान भगवान विष्णु की त्रिकाल पूजा करने से मनुष्य इंद्रियों पर नियंत्रण पाता है, मन को शांति मिलती है और ज्ञान व विद्या में वृद्धि होती है।
माघ स्नान का वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्व
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय में सिद्धांत दर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो. चंद्रशेखर पांडेय कहते हैं कि हमारे ऋषि-मुनियों ने व्रत और पर्व किसी न किसी वैज्ञानिक और सामाजिक उद्देश्य से बनाए हैं। उनके अनुसार माघ मास में तपश्चर्यापूर्ण जीवन, कल्पवास और गंगा में त्रिकाल स्नान करने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) मजबूत होती है।
शिशिर ऋतु में आत्मसंयम से मिलता है निरोगी जीवन
शिशिर ऋतु के दौरान माघ स्नान और संयम का अभ्यास व्यक्ति को हर परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता देता है। यह अभ्यास कम संसाधनों में भी जीवन को सुखमय, संतुलित और रोगमुक्त बनाने का मार्ग दिखाता है। माघ मास हमें सिखाता है कि सादगी, संयम और अनुशासन से जीवन को बेहतर और सार्थक बनाया जा सकता है।

