नई दिल्ली: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। इसे शिव की ‘महान रात्रि’ भी कहा जाता है। खास बात यह है कि इस रात को चार प्रहरों में विभाजित करके पूजा करने का विधान है। ज्यादातर लोग केवल प्रदोषकाल में ही शिव पूजा करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार यदि पूरी रात चार प्रहरों में भगवान शिव की पूजा की जाए तो जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
चार प्रहर की पूजा क्या है?
रात्रि को चार बराबर हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें प्रहर कहा जाता है। महाशिवरात्रि की रात इन चार प्रहरों में शिवलिंग का विशेष रूप से अभिषेक और पूजन करना ही ‘चार प्रहर पूजा’ कहलाता है। ऐसा करने से भक्त के जीवन के कष्ट कम होते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि व मानसिक एकाग्रता बढ़ती है।

महाशिवरात्रि 2026 में चार प्रहर की पूजा का समय
महाशिवरात्रि 2026 की रात में चार प्रहर इस प्रकार होंगे:
प्रथम प्रहर: 06:11 PM – 09:23 PM
द्वितीय प्रहर: 09:23 PM – 12:35 AM (16 फरवरी)
तृतीय प्रहर: 12:35 AM – 03:47 AM (16 फरवरी)
चतुर्थ प्रहर: 03:47 AM – 06:59 AM (16 फरवरी)
चार प्रहर पूजा की विधि
चार प्रहर की पूजा आसान है, लेकिन इसमें नियमितता और श्रद्धा महत्वपूर्ण है। हर प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और फल, बेलपत्र अर्पित करना आवश्यक है। साथ ही हर प्रहर में नया दीपक जलाना चाहिए।
प्रथम प्रहर: जल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
द्वितीय प्रहर: दही, शहद या पंचामृत से अभिषेक करें।
तृतीय प्रहर: घी या दूध से अभिषेक करें।
चतुर्थ प्रहर: शुद्ध जल से अभिषेक करें और इस प्रहर में आरती करें।
पूजा के बाद सभी में प्रसाद वितरित करना शुभ माना जाता है।
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चार प्रहर पूजा के लाभ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थनाओं को शीघ्र स्वीकार करते हैं। चार प्रहर पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह पूजा मन को शांत करने, मानसिक शक्ति बढ़ाने और आत्मशुद्धि में मदद करती है।
ध्यान दें: यह जानकारी धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं लिया जा सकता।