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Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर नियमों का पालन क्यों माना जाता है जरूरी? स्नान-दान से लेकर भोजन तक इन बातों का रखें ध्यान

January 11, 2026

Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर नियमों का पालन क्यों माना जाता है जरूरी? स्नान-दान से लेकर भोजन तक इन बातों का रखें ध्यान

Makar Sankranti Rules 2026 : मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और शुभ पर्व है, जिसे खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व प्राप्त है। सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ उत्तरायण काल आरंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण को देवताओं का समय कहा जाता है, इसलिए इस अवधि में किए गए शुभ कर्म कई गुना फल देते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति पर कुछ नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश क्यों है महत्वपूर्ण

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा की ओर गति करने लगते हैं, जिसे उन्नति, शुभता और नई शुरुआत का संकेत माना जाता है।

स्नान और सूर्य को अर्घ्य का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र जल से स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि बिना स्नान किए भोजन करना इस दिन वर्जित होता है।

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भोजन से जुड़े नियम

इस पर्व पर सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। सूर्यास्त के बाद भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है। तिल और गुड़ से बने व्यंजन जैसे लड्डू, चिकी या खिचड़ी का सेवन और दान विशेष फलदायी माना जाता है।

किन चीजों से करें परहेज

मकर संक्रांति के दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन निषिद्ध माना गया है। कई क्षेत्रों में इस दिन रोटी बनाने से भी परहेज किया जाता है, जबकि खिचड़ी को पुण्यदायी भोजन माना जाता है।

पेड़-पौधों और फसलों से जुड़ी मान्यता

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन वृक्षों की कटाई या पौधों की छंटाई नहीं करनी चाहिए। इसी कारण कई किसान इस दिन फसल काटने से भी बचते हैं। ऐसा विश्वास है कि इससे प्रकृति संतुलित रहती है और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्थाओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

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