Mandir Vastu Tips: घर में पूजास्थान या मंदिर का होना सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए भी जरूरी है। घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, स्वास्थ्य और मानसिक शांति बनी रहे, और आर्थिक स्थिति मजबूत हो इसके लिए मंदिर या पूजा स्थल का सही स्थान और स्थापना बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पूजा स्थान के लिए सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पूजा स्थल ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाना सर्वोत्तम माना गया है। अगर ईशान कोण संभव नहीं है तो पूर्व दिशा का चयन करें।
फ्लैट में पूजा स्थल चुनते समय सूर्य के प्रकाश पर ध्यान दें।
मंदिर का स्थान स्थायी होना चाहिए, बार-बार स्थान बदलने से शुभ ऊर्जा प्रभावित होती है।
रंग चयन हल्का पीला या सफेद रखें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

देवी-देवताओं की स्थापना के लिए टिप्स
मंदिर की संकीर्ण या जटिल आकृति की बजाय सरल पूजा स्थान बनाएं।
देवी-देवताओं की मूर्तियों या चित्रों की भीड़ न लगाएं।
मूर्तियों की ऊँचाई 12 अंगुल से अधिक न हो, चित्र की बड़ी आकार की सीमा नहीं है।
मूर्तियों को आसन या चौकी पर स्थापित करें।
पूजा स्थल पर शंख, गोमती चक्र और जल पात्र जरूर रखें।
पूजा स्थल को जागृत और सक्रिय करने के उपाय
सुबह और शाम एक नियत समय पर पूजा करें।
शाम की पूजा में दीपक जरुर जलाएं और उसे पूजा स्थल के मध्य रखें।
मंत्र जाप और कीर्तन से घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
मंदिर हमेशा साफ-सुथरा रखें और लोटे में जल भरकर रखें।
यदि गुरु मंत्र ज्ञात नहीं है तो गायत्री मंत्र का जाप करें।
पूजा के बाद अर्पित जल या प्रसाद ग्रहण करें, इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
वास्तु नियमों का लाभ
सही दिशा और नियमों के अनुसार मंदिर स्थापित करने से:
घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
घर के सदस्यों में संतुलित और स्वस्थ संबंध बने रहते हैं।
ये भी पढ़ें: Bank Strike Today: देशभर में सरकारी बैंक आज बंद, इस मांग को लेकर कर्मचारी कर रहे हड़ताल
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
घर में पूजा स्थल और देवी-देवताओं की स्थापना केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि घर की समृद्धि और खुशहाली के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।