धार्मिक डेस्क: हिंदू धर्म में मंत्र जाप को मन को शांत करने और ध्यान लगाने का एक अच्छा तरीका माना जाता है। बहुत से लोग मंत्रों का जाप माला के साथ करते हैं। माला से जाप करने के भी कुछ धार्मिक नियम बताए गए हैं। इनमें माला को सही तरीके से पकड़ना और मनकों को सही उंगली से फेरना शामिल है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जाप करते समय माला को तर्जनी यानी अंगूठे के पास वाली उंगली से नहीं छूना चाहिए। इसके पीछे कुछ आध्यात्मिक कारण बताए जाते हैं। माना जाता है कि तर्जनी उंगली अहंकार और अधिकार का प्रतीक है, जबकि जाप का उद्देश्य मन को शांत और एकाग्र करना होता है।
तर्जनी को माला से क्यों रखा जाता है अलग?
परंपरागत मान्यताओं में तर्जनी उंगली को अहंकार, अधिकार और निर्देश देने के भाव से जोड़ा जाता है। सामान्य तौर पर इसी उंगली से किसी व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत किया जाता है। वहीं, मंत्र साधना का उद्देश्य मन को भीतर की ओर केंद्रित करना और चित्त को शांत करना माना जाता है। इसी वजह से जप की प्रक्रिया में तर्जनी को माला से अलग रखने की परंपरा बनी हुई है। आम तौर पर माला को अनामिका पर टिकाकर अंगूठे और मध्यमा उंगली की मदद से मनकों को आगे बढ़ाया जाता है।
जप के दौरान कैसे फेरें माला?
मंत्र का जाप करते समय प्रत्येक मंत्र के साथ एक मनका आगे बढ़ाने की परंपरा है। तर्जनी को माला से दूर रखते हुए अंगूठे और मध्यमा के सहारे मनकों को घुमाया जाता है।
धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि जप करते समय माला को जमीन पर नहीं रखना चाहिए और न ही उसे अनावश्यक रूप से नीचे गिरने देना चाहिए।
सुमेरु मनके को पार करने की परंपरा
जप की माला में आमतौर पर 108 मनके होते हैं। इसमें एक बड़ा मनका भी होता है, जिसे सुमेरु या गुरु मनका कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जप करते समय सुमेरु मनके को पार नहीं करना चाहिए। जब जप करते हुए सुमेरु मनके तक पहुंच जाएं, तो माला को पलटकर दूसरी दिशा से मनके फेरते हुए जाप जारी रखना चाहिए।
गोमुखी में माला रखने की क्या वजह है?
कई लोग मंत्र जाप करते समय माला को गोमुखी नाम की कपड़े की थैली में रखते हैं। इससे माला ढकी रहती है और जाप करते समय ध्यान भी आसानी से लगा रहता है। हालांकि, गोमुखी का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं।
जप से पहले स्वच्छता का ध्यान
परंपरागत रूप से मंत्र जाप से पहले शरीर और मन की शुद्धता पर जोर दिया जाता है। इसलिए स्नान या हाथ-पैर धोकर साफ कपड़े पहनकर शांत स्थान पर बैठने की सलाह दी जाती है। जप के लिए स्वच्छ आसन का इस्तेमाल करने की भी परंपरा है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में माला को नाभि के नीचे न ले जाकर हृदय के आसपास या उससे ऊपर रखकर जाप करने की बात कही गई है।
किस दिशा में और कब करें मंत्र जाप?
मंत्र जाप के लिए सुबह का समय अच्छा माना जाता है। खासकर ब्रह्म मुहूर्त में जाप करना कई धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। इस समय वातावरण शांत होता है, इसलिए ध्यान लगाने में आसानी होती है।
जाप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठने की परंपरा है। हालांकि, हर मंत्र और साधना के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अगर गुरु या अपनी धार्मिक परंपरा से कोई खास नियम बताया गया है, तो उसी का पालन करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

