Site icon Dainik Savera Times

Meen Sankranti 2026: 14 या 15 मार्च… कब है मीन संक्रांति, जानें सही तिथि और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

Meen Sankranti 2026 Date

Meen Sankranti 2026 Date

Meen Sankranti 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है, तब उसे मीन संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में मीन संक्रांति को लेकर लोगों के बीच यह सवाल है कि यह 14 मार्च को है या 15 मार्च को।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार मीन संक्रांति का पुण्यकाल 15 मार्च 2026 की सुबह 7 बजकर 25 मिनट तक माना गया है। संक्रांति के समय स्नान, दान और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है।

मीन संक्रांति का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसी दिन से खरमास की शुरुआत हो जाती है, जो लगभग एक महीने तक चलता है। हिंदू धर्म में साल में दो बार खरमास लगता है एक बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और दूसरी बार मीन राशि में प्रवेश के समय। इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य इस दौरान नहीं किए जाते।

ये भी पढ़ें :

मीन संक्रांति के दिन क्या करें

मीन संक्रांति के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें सिंदूर, लाल पुष्प और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदित्य हृदय स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा सूर्य मंत्र का जप और धार्मिक ग्रंथों जैसे गीता और रामायण का पाठ भी शुभ माना गया है।

जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान-पुण्य करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

ये भी देखें :

मीन संक्रांति पर क्या दान करें

धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन अन्न, तांबे के बर्तन, भोजन, वस्त्र, गुड़, घी और पीले या सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सूर्य देव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

Exit mobile version