Last Updated: September 21, 2026

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शादी का कार्ड बनवाने में भूलकर न करें ये गलती, नहीं तो बिगड़ जाएगा वैवाहिक जीवन

June 11, 2026

शादी का कार्ड बनवाने में भूलकर न करें ये गलती, नहीं तो बिगड़ जाएगा वैवाहिक जीवन

नई दिल्ली: शादी के कुछ दिनों पहले ही घर में कार्ड छपवाने की तैयारियां तेज हो जाती हैं। हिंदू परंपरा में विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है, जिसकी शुरुआत निमंत्रण पत्र यानी शादी के कार्ड से होती है। ऐसे में वास्तु शास्त्र के अनुसार कार्ड का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वैवाहिक जीवन की ऊर्जा और शुभता से जोड़ा जाता है।

रंगों का सही चयन माना जाता है शुभ

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार शादी के कार्ड के लिए ऐसे रंग चुनने चाहिए जो सकारात्मकता और सौभाग्य का प्रतीक हों। लाल, पीला, केसरिया, मैरून और गोल्डन जैसे रंग शुभ माने जाते हैं। लाल रंग प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जबकि पीला और केसरिया रंग धार्मिकता और शुभता से जुड़े होते हैं।

शुभ प्रतीकों का होना जरूरी

शादी के निमंत्रण पत्र पर शुभ प्रतीकों का होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान गणेश, स्वास्तिक, ओम और कलश जैसे पवित्र चिह्न कार्ड में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। मान्यता है कि इससे विवाह समारोह में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती और कार्य शुभ रूप से संपन्न होता है।

आकार और डिजाइन का भी होता है प्रभाव

वास्तु के अनुसार कार्ड का आकार भी विशेष महत्व रखता है। आयताकार (Rectangle) और वर्गाकार (Square) कार्ड को संतुलन और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वहीं गोल, अंडाकार या नुकीले कोनों वाले डिजाइन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

शब्दों की शुद्धता भी जरूरी

शादी के कार्ड में लिखे जाने वाले शब्दों की भाषा सरल, स्पष्ट और सम्मानजनक होनी चाहिए। कार्ड की शुरुआत सामान्यतः ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’ या किसी मांगलिक श्लोक से की जाती है, जिससे शुभ कार्य की शुरुआत मानी जाती है।

पेपर और फिनिशिंग का चयन

विशेषज्ञों का मानना है कि शादी के कार्ड के लिए हमेशा साफ और उच्च गुणवत्ता वाले कागज का उपयोग करना चाहिए। इको-फ्रेंडली या हैंडमेड पेपर को अधिक शुभ माना जाता है। वहीं चमड़े (लेदर फिनिश) या अधिक चमकदार रासायनिक कोटिंग वाले कार्ड से बचने की सलाह दी जाती है।

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शुभ शुरुआत के लिए परंपरागत मान्यता

परंपरा के अनुसार, शादी का कार्ड सबसे पहले घर के मंदिर में भगवान गणेश के चरणों में रखा जाता है। इसके बाद कुलदेवी या कुलदेवता को अर्पित करने के बाद ही रिश्तेदारों और मित्रों को निमंत्रण भेजा जाता है। माना जाता है कि इस प्रक्रिया से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में शुभता बनी रहती है।

वास्तु शास्त्र के ये नियम आज भी कई परिवारों द्वारा अपनाए जाते हैं, ताकि नए जीवन की शुरुआत सुख-समृद्धि और सौहार्द के साथ हो सके।

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