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Mouni Amavasya 2026 : घर बैठे जपें ये 12 मंत्र, गंगा स्नान के समान मिलेगा पुण्य लाभ

Mouni Amavasya 2026

Mouni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का दिन सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दिन मौन, स्नान, दान और जप-तप को अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, हर किसी के लिए गंगा या अन्य तीर्थों तक पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में शास्त्रों में बताए गए कुछ मंत्रों का श्रद्धा के साथ जप करके भी गंगा स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त किया जा सकता है।

यहां हम आपको मौनी अमावस्या पर घर बैठे किए जाने वाले 12 विशेष मंत्रों के बारे में बता रहे हैं, जिनका जप स्नान, आत्मशुद्धि और पितृ कृपा तीनों के लिए लाभकारी माना गया है।

स्नान करते समय जपें ये पवित्र मंत्र

घर में स्नान करते समय इन मंत्रों का उच्चारण करने से सभी तीर्थों का भावात्मक फल प्राप्त होने की मान्यता है-

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

सर्वे समुद्रा सरितस्तीर्थानि जलदानदा।
आयान्तु मम शान्त्यर्थं दुरितक्षयकारकाः॥

Mouni Amavasya 2026
Mouni Amavasya 2026

हर हर गंगे

इन मंत्रों के जप से साधारण जल भी तीर्थ जल के समान पवित्र माना जाता है और स्नान आध्यात्मिक स्नान में परिवर्तित हो जाता है।

आत्मशुद्धि और देव कृपा के लिए 5 प्रभावशाली मंत्र

मौनी अमावस्या पर एकांत स्थान में बैठकर इन मंत्रों का जप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है-

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ सूर्याय नमः
(या) ॐ घृणि सूर्याय नमः

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का नियमित जप आत्मबल को बढ़ाने और ईश्वर से जुड़ाव को गहरा करने वाला माना जाता है।

पितृ दोष शांति और आशीर्वाद के लिए 4 मंत्र

मौनी अमावस्या को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए विशेष माना गया है। यदि पिंडदान या तर्पण संभव न हो, तो इन मंत्रों का जप लाभकारी माना जाता है-

ॐ पितृभ्यः नमः

ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः पितृगणाय च नमः

ॐ पितृगणाय विद्महे जगत् धारिणे धीमहि।
तन्नः पितरः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों के जप से पितरों की कृपा प्राप्त होने और पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि की मान्यता है।

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कैसे करें जप?

ब्रह्म मुहूर्त या प्रातः स्नान के बाद जप करें

स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें

यथासंभव मौन का पालन करें

श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्रों का उच्चारण करें

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डिस्क्लेमर:

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्थाओं पर आधारित है। यहां दी गई जानकारी का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक इसे अपनी श्रद्धा और विवेक के अनुसार ग्रहण करें।

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