Navratri 2025 : देशभर में मां दुर्गा के आगमन की धूम है। शक्ति साधना और उपवास का महापर्व शारदीय नवरात्रि 2025 आज से शुरू हो गया है, जो कि 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा। इन नौ दिनों में माता रानी के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। लाखों श्रद्धालु इन दिनों उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ में लीन रहते हैं।
लेकिन इस धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। धर्मशास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन दिनों में कुछ सामान्य दिखने वाली गलतियां आपके व्रत और साधना को निष्फल कर सकती हैं। आइए जानते हैं, व्रत के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए।
1. प्याज-लहसुन और मांसाहार का सेवन वर्जित
नवरात्रि व्रत में तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन का सेवन सख्त रूप से वर्जित है।
धार्मिक मान्यता:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत चुराने वाले दैत्य के शरीर से गिरने वाली रक्त की बूंदों से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई थी। इसी वजह से इन्हें राहु-केतु का प्रतीक और तामसिक माना जाता है।
वैज्ञानिक कारण:
नवरात्रि के समय मौसम बदलता है, जिससे शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होती है। प्याज-लहसुन जैसी गर्म चीजें शरीर में असंतुलन पैदा कर सकती हैं, इसलिए इन्हें त्यागना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उचित है।
2. बाल, दाढ़ी और नाखून काटना वर्जित
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में शरीर को उसकी प्राकृतिक अवस्था में रखना चाहिए।
आध्यात्मिक कारण:
ये नौ दिन तपस्या और संयम के माने जाते हैं। इस दौरान बाहरी सजावट से ज्यादा आंतरिक शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। बाल और नाखून काटना भौतिक आकर्षण की ओर इंगित करता है, जो साधना में बाधा डाल सकता है।
3. चमड़े की वस्तुएं पहनने से बचें
नवरात्रि में पवित्रता और करुणा की भावना सर्वोपरि मानी जाती है।
धार्मिक कारण:
चमड़ा पशु की हत्या से प्राप्त होता है, और नवरात्रि जैसे पुण्य पर्व पर हिंसा से जुड़ी वस्तुओं का उपयोग अशुभ माना जाता है।
क्या न करें:
बेल्ट, लेदर बैग, चमड़े के जूते या घड़ी की स्ट्रैप्स से बचें और कपड़े या जूट से बने विकल्प अपनाएं।
4. दिन में सोना है वर्जित
नवरात्रि में दिन के समय नींद लेने से साधना की ऊर्जा और लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
धार्मिक मान्यता:
इन दिनों वातावरण में विशेष दिव्य ऊर्जा सक्रिय रहती है। दिन में सोने से यह ऊर्जा अवरुद्ध होती है और शरीर में आलस्य बढ़ता है।
क्या करें:
दिन का अधिकतम समय मां दुर्गा के भजन, पूजन, ध्यान और धार्मिक ग्रंथों के पाठ में लगाएं।
नवरात्रि 2025 की खास बातें:
आरंभ: 22 सितंबर 2025 (प्रतिपदा)
कलश स्थापना और घटस्थापना आज प्रातः शुभ मुहूर्त में सम्पन्न हो रही है।
अंतिम दिन: 2 अक्टूबर 2025 (विजयादशमी)
शुभ नवरात्रि, जय माता दी

