Last Updated: November 3, 2026

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बजरंग बली के इस दरबार से नहीं लौटता कोई निराश, दर्शन करने से कुष्ठ रोग से मिलती हैं मुक्ति

September 2, 2024

बजरंग बली के इस दरबार से नहीं लौटता कोई निराश, दर्शन करने से कुष्ठ रोग से मिलती हैं मुक्ति

छत्तीसगढ़ : हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कलियुग में सबसे ज्यादा भगवान शंकर के 11वें रुद्र अवतार हनुमानजी की ही पूजा की जाती है। आज हम आपकाे हनुमान जी एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर उनकी देवी स्वरुप में पूजा की जाती हैं। यहां दर्शन करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती हैं, जाे भी भक्त सच्चे दिल से यहां से कुछ मांगता हैं उसे हुनमान जी पूरा करते हैं। राजा पृथ्वीदेवजू को स्वप्न में हनुमान जी ने दर्शन दिए थे। उसके बाद उन्हाेंने इस मंदिर का निर्माण कराया था, ताे चलिए जानते हैं मंदिर के इतिहास के बारे में…

हनुमान जी का ये मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से 25 कि. मी. दूर रतनपुर हैं, जहां पर गिरिजाबंध हनुमान जी का यह अनोखा मंदिर स्थित हैं। मां महामाया देवी और गिरजाबंध में स्थित यह हनुमानजी का मंदिर है। कई हजार सालों से इस मंदिर में हनुमान जी को एक नारी के स्वरूप में पूजा जाता है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि रतनपुर के राजा ने स्वप्न में हनुमान जी को दर्शन देकर मंदिर बनवाने को कहा था।

पौराणिक कथा के अनुसार, रतनपुर के राजा पृथ्वीदेवजू ने इसका निर्माण करवाया था। राजा के पास किसी चींज की काेई कमी नहीं थी, लेकिन वह कुष्ठ रोग से पीड़ित था। यहां तक की राजा ने जीवन त्यागने का विचार बना लिया था। इसी चिंता में वह एक बार सोचते हुए सो गया। तब राजा ने स्वप्न में देखा कि हनुमान जी की वेशभूषा किसी देवी के जैसी है, लेकिन वह देवी नहीं, लंगूर हैं पर लंगूर की पूंछ नहीं है। साथ ही उनके एक हाथ में लड्डू से भरी थाली है तो दूसरे हाथ में राम मुद्रा अंकित है। कानों में भव्य कुंडल हैं। माथे पर सुंदर मुकुट माला है। हनुमान जी ने राजा को मंदिर बनवाने का निर्देश देते हुए कहा कि, ‘हे राजन मैं तेरी भक्ति से प्रसन्न हूं। तुम्हारा कष्ट अवश्य दूर होगा। तू एक मंदिर का निर्माण करवा और उसमें मेरे इस स्वरूप की स्थापना करवा दें। तुझे कुष्ठ रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

इसके बाद राजा ने गिरजाबंध में मंदिर बनवाया, फिर राजा ने सोचा मूर्ति कहां से आएगी। तब एक रात फिर से स्वप्न में हनुमान जी ने दर्शन दिए और कहा कि मां महामाया के कुण्ड में मेरी मूर्ति रखी हुई है। राजा जब मूर्ति ढूंढने गया ताे वह असफल रहा, फिर अगले दिन राजा काे स्वप्न में हनुमान जी ने मूर्ति तलाश करने को कहा, तब जाकर राजा काे दूसरे दिन वहां से आलौकिक मूर्ति घाट में मिली। इसके बाद विधिविधान पूर्वक मूर्ति को मंदिर में लाकर प्रतिष्ठित किया गया और मंदिर के पीछे तालाब खुदवाया जिसका नाम गिरजाबंध रख दिया।

हनुमान जी ने राजा को कुष्ठ रोग से मुक्त किया। उसी तरह राजा ने हनुमान जी से वरदान मांगा कि हे प्रभु, जो भी श्रद्धालु इस देवस्थान के दर्शन करने आए उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कीजिएगा। उस दिन के बाद जाे काेई भी इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आता हैं उसके सारे कष्ट दूर हाेते हैं।

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