Indira Ekadashi 2026: पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों की शांति के लिए तर्पण, प्रार्थना और दीपदान करने की परंपरा भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संध्या के समय कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।
आज रखा जा रहा है इंदिरा एकादशी व्रत
पंचांग के अनुसार, आज, 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी मनाई जा रही है। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी को पूर्वजों की शांति के लिए किए जाने वाले धार्मिक कर्मों से भी जोड़ा जाता है। शाम के समय दीपदान करना इस दिन किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक उपायों में माना जाता है।
1. पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष का संबंध पितरों से भी माना गया है। इंदिरा एकादशी की शाम पीपल के नीचे दीपक जलाकर पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करने की परंपरा है।
कुछ लोग आटे से चौमुखा दीपक बनाकर उसमें काले तिल और गुड़ रखते हैं तथा चार बत्तियां जलाते हैं। दीपक में तिल का तेल या घी इस्तेमाल करने की भी परंपरा बताई जाती है। यह उपाय श्रद्धा और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ा है।
2. तुलसी के पौधे के पास करें दीपदान
तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को प्रिय माना जाता है। इसलिए इंदिरा एकादशी पर शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण किया जा सकता है।
मान्यता है कि तुलसी के समीप दीप प्रज्वलित करने से घर का वातावरण सकारात्मक होता है और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की गई प्रार्थना का धार्मिक महत्व बढ़ता है।
3. विष्णु मंदिर में जलाएं दीपक
इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन शाम को किसी विष्णु मंदिर में जाकर भगवान के सामने दीपक जलाना और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान कर परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है।
4. नदी के किनारे दीपदान की परंपरा
पवित्र नदी के तट पर दीपदान को भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। इंदिरा एकादशी की शाम गंगा, यमुना या किसी अन्य पवित्र नदी के किनारे दीपक जलाकर पितरों की शांति की प्रार्थना करने की परंपरा है।
यदि नदी के तट तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही स्वच्छ जल से भरे कलश के पास दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण किया जा सकता है।
पूजा के बाद करें दान
इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दान को पुण्य कर्म से जोड़ा गया है।
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ध्यान रखें, ये धार्मिक मान्यताएं हैं
पीपल, तुलसी, मंदिर या नदी के किनारे दीपदान से पितृ दोष दूर होने या निश्चित रूप से किसी समस्या का समाधान होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ये उपाय हिंदू धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।

