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हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 09 फरवरी 2024

February 9, 2024

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 09 फरवरी 2024

रागु वडहंसु महला १ घरु ५ अलाहणीआ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ॥ मुहलति पुनी पाई भरी जानीअड़ा घति चलाइआ ॥ जानी घति चलाइआ लिखिआ आइआ रुंने वीर सबाए ॥ ॥ कांइआ हंस थीआ वेछोड़ा जां दिन पुंने मेरी माए ॥ जेहा लिखिआ तेहा पाइआ जेहा पुरबि कमाइआ ॥ धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥१॥

राग वडहंस, घर ५ में गुरु नानकदेव जी की बाणी ‘अलाहनियाँ’।अकालपुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। वह सिरजनहार पातशाह सदा कायम रहने वाला है, जिस ने जगत को माया के आहर में लगा रखा है। जब जीव को मिला समां ख़तम हो जाता है और जब इस की उम्र की प्याली भर जाती है तो (सरीर के) प्यारे साथी को पकड़ के आगे लगा लिया जाता है। (उम्र का समां ख़तम होने पर) जब परमात्मा का लिखा (हुक्म) आता है तो सारे सज्जन संबंधी रोते हैं। हे मेरी माँ! जब उम्र के दिन पूरे हो जाते हैं, तो सरीर और जीवात्मा का (सदा के लिए) विशोड़ा हो जाता है। (उस अंत समय से) पहले पहले जो जो कर्म जिव ने कमाया होता है (उस उस के अनुसार) जैसा जैसा संसार का लेख (उस के माथे पर) लिखा जाता है वैसा फल जीव पाता है। वह सिरजनहार पातशाह सदा कायम रहने वाला है, जिस ने जगत को माया के आहर में लगा रखा है॥१॥

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