Site icon Dainik Savera Times

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 13 दिसंबर 2023

 

रागु सोरठी बानी भगत कबीर जी की घरू 1
रघु सोरठी बानी भगत कबीर जी की घरु 1

राग सोरठि , घर १ में भगत कबीर जी की बाणी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे संत जनों। (मेरे) पवन (जैसे चंचल) मन को (अब) सुख मिल गया है, (अब यह मन प्रभु का मिलाप) हासिल करने योग्य थोडा बहुत समझा जा सकता है॥रहाउ॥ (क्योंकि) सतिगुरु ने (मुझे मेरी वह) कमजोरी दिखा दिया है, जिस कारण (कामादिक) पशु अडोल ही (मुझे) आ दबाते थे। (सो, मैं गुरु की कृपा से सरीर के) दरवाजे (ज्ञान इन्द्रियां, पर निंदा, पर तन, पर धन आदिक ) बंद कर लिए हैं, और (मेरे अंदर प्रभु की सिफत-सलाह के) बाजे एक-रस बजने लग गए हैं॥१॥ (मेरा) हृदय-कमल रूप घड़ा (पहले विकारों के) पानी से भरा हुआ था, (अब गुरु की बरकत से मैंने वह) पानी गिरा दिया है, और (हृदय को) ऊँचा कर दिया है। हे दास कबीर! (अब) कह कि मैंने (प्रभु के साथ) जान-पहचान कर ली है, और जब से यह साँझ पड़ी है, (मेरा मन (उस प्रभु में है) मस्त हो गया है॥२॥१०॥

 

Exit mobile version