Pana Sankranti 2026: देश के पूर्वी हिस्सों, खासकर ओडिशा में 14 अप्रैल 2026 को पना संक्रांति का पर्व बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे ओड़िया नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी जाना जाता है और ‘महा बिसुबा संक्रांति’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस दिन सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही नए साल का आरंभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी-देवताओं की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मंदिरों में विशेषकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और हनुमान जी के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। ओडिशा में इसी दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है।
शुभ मुहूर्त और पुण्य काल
ज्योतिष के अनुसार, 14 अप्रैल की सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। पना संक्रांति का पुण्य क्षण सुबह 9:39 बजे रहेगा। महा पुण्य काल सुबह 7:33 बजे से 11:44 बजे तक रहेगा, जबकि सामान्य पुण्य काल सुबह 6:22 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक माना गया है।
पूजा विधि और परंपराएं
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने का विशेष महत्व है, खासकर पवित्र नदियों में स्नान को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के आंगन में तुलसी के पौधे के ऊपर मिट्टी का पात्र लटकाकर उसमें छोटा छेद किया जाता है, जिससे पानी की बूंदें लगातार तुलसी पर गिरती रहें। पना संक्रांति का प्रमुख आकर्षण ‘पना’ नामक विशेष पेय है, जिसे गुड़, दही, छैना, केला और बेल के फल से तैयार किया जाता है। इस पेय को भगवान जगन्नाथ और तुलसी माता को अर्पित किया जाता है।
इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना, मंदिर जाकर बजरंगबली के दर्शन करना और सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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पर्व का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि पना संक्रांति के दिन ही हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए ओडिशा में इस दिन हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धा के साथ किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है। पना संक्रांति का यह पावन अवसर लोगों को नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।

