Last Updated: September 27, 2026

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28 सितंबर का पंचांग: पूर्वजों के निमित्त द्वितीया पर करें तर्पण और पिंडदान, सुबह 11:53 से दोपहर 12:41 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

September 27, 2026

28 सितंबर का पंचांग: पूर्वजों के निमित्त द्वितीया पर करें तर्पण और पिंडदान, सुबह 11:53 से दोपहर 12:41 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

नई दिल्लीः हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 28 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रात 7:13 बजे तक रहेगा। इसके बाद तृतीया शुरू हो जाएगी। सोमवार सुबह 6:21 बजे सूर्योदय और शाम 5:13 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 7:13 चंद्रोदय और सुबह 8:41 बजे चंद्रास्त होगा। इस दिन पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की शांति, पिंडदान और तर्पण करेंगे। पितृ पक्ष और सोमवार का दिन होने की वजह से भगवान शिव की पूजा और उनके मंत्रों का जाप किया जा सकता है।। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश करने से सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र तेरहवां नक्षत्र है, जिसका अर्थ ‘हाथ’ होता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। सोमवार सुबह 8:53 बजे के बाद व्याघात योग लगेगा जो अगले दिन सुबह 6:12 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, व्याघात योग 27 नित्य योगों में से 13वां योग है। ‘व्याघात’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘आघात करना’, ‘विनाश’ या ‘बड़ी बाधा’ होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों का योग 160 अंश से 173 अंश 20 कला के बीच होता है, तब यह योग बनता है। पंचांग के अनुसार इसके शुरुआती समय को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। इस योग में जन्मे लोग अत्यधिक ऊर्जावान, निडर और साहसी होते हैं। वे वायु की तरह हर बाधा को चीरकर आगे बढ़ते हैं। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है।

आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है। सोमवार को सुबह 7:57 से 9:29 बजे तक अमृत काल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन राहुकाल सुबह 7:50 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है।

राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। सोमवार को गुलिक काल दोपहर 1:46 से शाम 3:15 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है। इस दिन यमगंड काल सुबह 10:48 से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है।

इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए। सोमवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। जब चंद्रमा मीन राशि में होता है तो व्यक्ति की भावनाओं, मन और स्वभाव पर बहुत गहरा असर डालता है।

चंद्रमा को मन का कारक माना गया है और मीन एक जल राशि है, इसलिए यह स्थिति व्यक्ति को अत्यधिक संवेदनशील और भावुक बनाती है। सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

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