Putrada Ekadashi Shubh Yog: सनातन परंपरा में पौष पुत्रदा एकादशी को बेहद पुण्यदायी माना गया है। वर्ष 2025 में यह एकादशी तिथि 30 और 31 दिसंबर दोनों दिन पड़ रही है। उदया तिथि के कारण कुछ श्रद्धालु 30 दिसंबर को व्रत रखेंगे, जबकि कुछ 31 दिसंबर को एकादशी का पालन करेंगे।
इस बार पुत्रदा एकादशी को खास बनाने वाली बात यह है कि इन दिनों कई दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो कुछ राशियों के लिए भाग्य परिवर्तन के संकेत दे रहे हैं।
बन रहे हैं ये प्रमुख शुभ योग
रवि योग: 30 दिसंबर सुबह 07:13 बजे से 31 दिसंबर तड़के 03:58 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 31 दिसंबर सुबह 03:58 बजे से 07:14 बजे तक
त्रिपुष्कर योग: 31 दिसंबर सुबह 05:00 बजे से 07:14 बजे तक
इसके साथ ही 30 दिसंबर को शनि और बुध का केंद्र दृष्टि योग भी बन रहा है, जो करियर और धन से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इन योगों का विशेष लाभ तीन राशियों को मिलने वाला है।
मिथुन राशि: आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहने वाला है। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि के संकेत हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे होंगे। व्यापार करने वालों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति और वेतन वृद्धि के योग बन रहे हैं। निवेश से भी लाभ मिलने की संभावना है, वहीं कुछ लोगों को विदेश यात्रा का अवसर मिल सकता है।
कन्या राशि: करियर में आएगा बड़ा बदलाव
कन्या राशि वालों के लिए 30 दिसंबर के बाद भाग्य का पूरा साथ मिलने वाला है। करियर में तेज़ी से प्रगति होगी और कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना की जाएगी। व्यापार में विस्तार के योग हैं और आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा सुदृढ़ होगी। नए प्रोजेक्ट या काम की शुरुआत हो सकती है। इस दौरान बने नए संपर्क भविष्य में आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे। संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ के संकेत हैं।
मकर राशि: सफलता और सम्मान के योग
मकर राशि के लिए ये शुभ योग विशेष रूप से फलदायी रहेंगे। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं और रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। विदेश में नौकरी या करियर से जुड़ा कोई बड़ा अवसर सामने आ सकता है। परिवार का सहयोग मिलेगा, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही, घर या संपत्ति खरीदने के योग भी बन रहे हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

