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Rangbhari Ekadashi 2026: दुर्लभ शुभ संयोग में मनाई जाएगी रंगभरी एकादशी, जानें तिथि और पूजा का सही समय

Kamada Ekadashi 2026 Puja Vidhi

Kamada Ekadashi 2026 Puja Vidhi

Rangbhari Ekdashi 2026 Shubh Yog: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विधान है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव माता पार्वती को पहली बार काशी नगरी लेकर आए थे, तभी से यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक विश्वास है कि इस दिन व्रत और विधिपूर्वक पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में यह पावन व्रत कब रखा जाएगा और कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं।

कब है रंगभरी एकादशी 2026?

वर्ष 2026 में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन कई अत्यंत मंगलकारी योगों का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ और व्रत के फल को और अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं।

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बन रहे हैं विशेष शुभ योग

इस बार रंगभरी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को अत्यंत फलदायी माना गया है।

आयुष्मान योग प्रातःकाल से शाम 7:44 बजे तक रहेगा।

सौभाग्य योग शाम 7:45 बजे तक प्रभावी रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर 28 फरवरी की सुबह 6:47 बजे तक रहेगा।

रवि योग सुबह 6:48 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा।

इन योगों में की गई पूजा-अर्चना और जप-तप शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।

एकादशी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि का आरंभ 27 फरवरी को रात्रि 12:33 बजे होगा और उसी दिन रात 10:32 बजे इसका समापन होगा।

पूजा के लिए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक

इन समयों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा शिव-पार्वती की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है।

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पारण का समय

रंगभरी एकादशी का व्रत पारण 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6:47 बजे से 9:06 बजे तक रहेगा। द्वादशी तिथि का समापन उसी दिन शाम 8:43 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार, व्रत का पारण निर्धारित मुहूर्त में ही करना चाहिए।

रंगभरी एकादशी केवल वैष्णव परंपरा ही नहीं, बल्कि शैव परंपरा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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