
Raviwar ke Upay: हिंदू धर्म में रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने से न केवल स्वास्थ्य लाभ होता है, बल्कि आर्थिक परेशानियां भी दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र में भी रविवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपायों को काफी प्रभावशाली माना गया है। तो आइए खबर में विस्तार से जानते हैं…
सूर्यदेव को जल अर्पित करें
यदि आपके घर में आर्थिक तंगी चल रही है, तो रविवार को सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना बेहद लाभकारी होता है। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें रोली या लाल चंदन अवश्य मिलाएं। सूर्य को जल चढ़ाते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाएं और भगवान भास्कर तथा माता लक्ष्मी से धन-संपत्ति और समृद्धि की कामना करें।
दूध का उपाय सौभाग्य बढ़ाए
रविवार की रात को सोने से पहले अपने सिरहाने एक गिलास दूध रखें। अगले दिन सुबह उठकर इस दूध को बबूल के पेड़ की जड़ में चढ़ा दें। ऐसा करने से व्यक्ति की आय में वृद्धि होती है और सौभाग्य का द्वार खुलता है। यह उपाय विशेष रूप से नौकरी और व्यवसाय में प्रगति के लिए कारगर माना जाता है।
कर्ज से मुक्ति के लिए झाड़ू का उपाय
यदि आप कर्ज से परेशान हैं और उससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो रविवार के दिन तीन नई झाड़ू खरीदें। इन्हें अपने घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें और अगली सुबह इन झाड़ुओं को किसी शिव मंदिर में दान कर दें। ऐसा करने से कर्ज संबंधी समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए
यदि कोई जरूरी कार्य लंबे समय से अटका हुआ है, तो हर रविवार पूजा करते समय तिलक अवश्य लगाएं और लाल रंग के वस्त्र पहनें। लाल रंग मंगल ग्रह से संबंधित होता है, जो ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इससे कुंडली में मंगल बलवान होता है और सभी रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं।
आरोग्य जीवन के लिए गायत्री मंत्र का जाप
जो लोग शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट में हैं, उन्हें रविवार के दिन भगवान सूर्य की पूजा के समय गायत्री मंत्र की एक माला (108 बार) जप करनी चाहिए। इससे न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)