Jaya Parvati Vrat 2026: हिंदू धर्म में जया पार्वती व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस व्रत की शुरुआत 27 जुलाई से हो गई है। यह व्रत लगातार पांच दिनों तक रखा जाता है और इसका समापन 1 अगस्त को होगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने और व्रत कथा का श्रवण करने से परिवार में सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जया पार्वती व्रत का महत्व
पंचांग के अनुसार जया पार्वती व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से प्रारंभ होकर श्रावण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है। इस व्रत को विशेष रूप से महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति, पति की लंबी आयु, संतान सुख और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए रखती हैं। व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ कथा सुनने की भी परंपरा है।

जया पार्वती व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कौडिन्य नगर में वामन नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सत्या के साथ रहते थे। उनके पास धन-संपत्ति और सभी सुख-सुविधाएं थीं, लेकिन संतान न होने के कारण दोनों अत्यंत दुखी थे।
एक दिन देवर्षि नारद उनके घर पहुंचे। दंपति ने उनका आदर-सत्कार किया और अपनी समस्या का समाधान पूछा। तब नारद जी ने उन्हें नगर के बाहर स्थित एक बिल्व वृक्ष के नीचे भगवान शिव और माता पार्वती के लिंग स्वरूप की श्रद्धापूर्वक पूजा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति से की गई आराधना से उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।
पांच वर्षों की भक्ति का मिला फल
नारद जी के निर्देश के बाद दंपति ने उस पवित्र शिवलिंग की नियमित पूजा शुरू कर दी। पांच वर्षों तक उन्होंने पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की।
एक दिन पूजा के लिए फूल एकत्र करते समय वामन ब्राह्मण को सांप ने डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। पति के देर तक घर न लौटने पर सत्या उन्हें खोजते हुए वन पहुंची। वहां पति को मृत देखकर उसने माता पार्वती का स्मरण करते हुए करुण प्रार्थना की।
माता पार्वती ने दिया जीवनदान
सत्या की भक्ति और पुकार से प्रसन्न होकर माता पार्वती स्वयं प्रकट हुईं। उन्होंने दिव्य अमृत के प्रभाव से वामन ब्राह्मण को पुनर्जीवित कर दिया। अपने पति को जीवित देखकर सत्या ने भगवान शिव और माता पार्वती का श्रद्धापूर्वक पूजन किया।
दंपति की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब उन्होंने संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त की।
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व्रत से मिला संतान सुख
माता पार्वती ने दंपति को जया पार्वती व्रत करने का निर्देश दिया और कहा कि इस व्रत के प्रभाव से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। माता की आज्ञा का पालन करते हुए दोनों ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। इसके पुण्य फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और उनका जीवन सुख, समृद्धि तथा आनंद से भर गया।
धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक जया पार्वती व्रत रखती हैं तथा इसकी कथा का श्रवण करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख, संतान सुख और इच्छित फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से जीवन में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि का वास होता है।