Sawan 2025 : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान भक्त विशेष रूप से शिवलिंग की पूजा करते हैं और भोलेनाथ को जल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद आदि अर्पित करते हैं। मान्यता है कि शिवलिंग की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आध्यात्मिक व आत्मिक उन्नति होती है।
शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाएं – बेलपत्र या जल?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर पूजन की शुरुआत सबसे पहले जल अर्पण से करनी चाहिए। यदि यह जल गंगा, यमुना या किसी अन्य पवित्र नदी से लाया गया हो, तो यह और भी शुभ माना जाता है। जल अर्पण के बाद ही बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। इसके बाद दूध, पुष्प, दही, शहद आदि चढ़ाए जाते हैं। सावन में शिव पूजा के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान…
–प्रातः काल स्नान और ध्यान करके शुद्ध मन से शिवलिंग की पूजा करें।
–विशेष रूप से सोमवार के दिन विधिपूर्वक पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
–यदि संभव न हो तो केवल एक लोटा जल अर्पित करके भी आप भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं।
–शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
–बेलपत्र अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और केवल अखंडित बेलपत्र ही चढ़ाएं।
–आप शिवलिंग पर 3, 5, 7, 9 या 11 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।
–जल और बेलपत्र के साथ दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बनी पंचामृत भी चढ़ाया जा सकता है।
–केतकी के फूल, हल्दी और सिंदूर शिवलिंग पर अर्पित करने से बचें, ये वर्जित माने गए हैं।
मंत्र जाप और स्तुति
शिव पूजन के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप या शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। यह आपके जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
सावन के इस पावन महीने में नियमों और श्रद्धा के साथ की गई शिव आराधना से न सिर्फ शिव कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं। इसलिए शिवलिंग पर अर्पण करने से पहले सही विधि और नियमों का पालन अवश्य करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

