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Sawan 2025: आज से सावन और कांवड़ यात्रा की हुई शुरुआत… 23 जुलाई तक चलेगी यात्रा, जानिए कथा, महत्व और नियम

Sawan 2025: आज 11 जुलाई से सावन माह का शुभारंभ हो गया है और इसी के साथ कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर देशभर के शिवभक्त “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए गंगाजल लेने के लिए पवित्र नदियों की ओर कूच कर चुके हैं। भक्तजन गंगा से जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए मीलों पैदल यात्रा करते हैं।

इस बार सावन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि आज तड़के 2:06 बजे से प्रारंभ हुई है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन की शुरुआत बेहद पवित्र मानी जा रही है और शुभ योग में कांवड़ यात्रा की शुरुआत को विशेष फलदायी माना गया है।

कब तक चलेगी कांवड़ यात्रा?

कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई को संपन्न होगी। इसके बाद भक्त अपने-अपने स्थानों पर भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। वहीं, सावन माह का समापन 9 अगस्त (शनिवार) को होगा।

पहला कांवड़िया कौन?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें सबसे पहले हलाहल विष निकला। यह विष इतना घातक था कि इसके प्रभाव से त्रिलोक में हाहाकार मच गया। देव-दानव इसे लेकर असमंजस में पड़ गए। तब भगवान शिव ने इसे संसार की रक्षा के लिए पी लिया और अपने कंठ में रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए।

विष के प्रभाव से उनके शरीर में तीव्र जलन होने लगी, तब देवताओं ने पवित्र नदियों के शीतल जल से उनका अभिषेक किया जिससे उन्हें शांति मिली। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, लंका नरेश रावण को पहला कांवड़िया माना जाता है। कहा जाता है कि उसने सावन माह में गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया था और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया था।

कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व

–ऐसा माना जाता है कि कांवड़ यात्रा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

–भक्त को रोग, भय, दरिद्रता और शोक से मुक्ति मिलती है।

–गंगाजल से जलाभिषेक करने से सभी पापों का नाश होता है।

–यह यात्रा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

–कांवड़िए को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है।

यात्रा के नियम और विशेष ध्यान देने योग्य बातें

–कांवड़ियों को पूर्ण रूप से सात्विक जीवन अपनाना चाहिए।
–यात्रा के दौरान शुद्धता, संयम और शांति बनाए रखें।
–किसी प्रकार का मादक पदार्थ, मांसाहार या तामसिक आहार से परहेज करें।
–यात्रा पूरी श्रद्धा और धैर्य के साथ पूर्ण करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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