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Sawan 2025: क्यों प्रिय है भगवान शिव को भस्म? जानें शिवलिंग पर भस्माभिषेक का महत्व और नियम

Sawan 2025: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, शहद आदि से अभिषेक करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भस्माभिषेक यानी भस्म से शिवलिंग का अभिषेक भी एक अत्यंत पुण्यदायक और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली विधि मानी जाती है?

भगवान शिव समस्त देवी-देवताओं में ऐसे एकमात्र देव हैं, जिन्हें भस्म (राख) अतिप्रिय है। वे स्वयं अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं, जो उनकी वैराग्य, नश्वरता और संसार के मिथ्यात्व का प्रतीक मानी जाती है। आइए खबर में विस्तार से जानते है…

भस्माभिषेक का आध्यात्मिक महत्व

भस्म, यानी अग्नि से उत्पन्न शुद्ध राख बता दे कि यह दर्शाता है कि इस संसार में हर वस्तु नश्वर है और अंत में सब कुछ राख बनकर ही रह जाता है। भगवान शिव द्वारा भस्म धारण करने का अर्थ है: वैराग्य का संदेश, अहम का अंत, और शाश्वत सत्य की स्वीकारोक्ति।

शिवलिंग पर भस्म से अभिषेक करने के लाभ

1. सभी कष्टों का निवारण:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आप भक्ति भाव से शिवलिंग पर भस्म अर्पित करते हैं, तो भगवान शिव आपके सभी दुखों का अंत करते हैं।

2. मोह-माया से मुक्ति:
भस्माभिषेक करने से व्यक्ति संसार के जाल से ऊपर उठता है और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है।

3. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा:
भस्म का अभिषेक करने से वातावरण की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

4. घर में शांति और समृद्धि:
यह क्रिया घर के वातावरण में संतुलन, सद्भाव और आत्मिक विकास को बढ़ावा देती है।

5. आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ:
भस्माभिषेक करने वाला व्यक्ति सांसारिक सुख के साथ-साथ आत्मिक उन्नति भी प्राप्त करता है।

शिवलिंग पर भस्म चढ़ाने के नियम

नियम                                                       विवरण

स्नान और शुद्धता                           भस्माभिषेक से पहले शुद्ध होकर स्नान करें और ध्यान करें।
शुभ समय                                    प्रातःकाल या संध्या प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) सबसे उपयुक्त होता है।
शुद्ध                                            भस्म का चयन केवल गोबर, लकड़ी या यज्ञ की अग्नि से बनी भस्म ही प्रयोग करें।
मंत्रोच्चारण                                    भस्म चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
तिलक करें                                   अभिषेक के बाद उसी भस्म से अपने मस्तक पर तिलक करना अत्यंत शुभ माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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