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सावन से पहले शिवभक्तों के लिए खास अवसर: 8 जुलाई को रखा जाएगा आषाढ़ महीने का अंतिम प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

Pradosh Vrat : सावन माह के आरंभ से पहले शिव भक्तों के लिए एक पावन अवसर आ रहा है भौम प्रदोष व्रत, जो इस बार 8 जुलाई 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए समर्पित होता है और इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। खास बात यह है कि इस बार यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

भौम प्रदोष व्रत के दोहरे लाभ होते हैं – एक तो शिव की कृपा प्राप्त होती है और साथ ही मंगल ग्रह से जुड़ी बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। 11 जुलाई से सावन माह शुरू हो रहा है, ऐसे में यह व्रत शिव भक्ति की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष तिथि पर भगवान शिव का स्मरण करने मात्र से जीवन के सभी संकट दूर होने लगते हैं। विशेषकर भौम प्रदोष के दिन पूजा करने से जीवन में तनाव, आर्थिक संकट और रोग समाप्त होते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है। यह व्रत व्यक्ति को सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति दिलाता है और सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलता है।

भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस शुभ दिन पर विधिपूर्वक पूजा करने से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। पूजा की विधि इस प्रकार है:

– सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
– शाम को निशित काल (संध्याकाल) में पूजा करें।
– पूजा स्थल को शुद्ध करके भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।
– इसके बाद शिवलिंग पर दूध, जल, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
– भगवान को सफेद फूल, बेलपत्र, धतूरा, भांग अर्पित करें।
– शिवलिंग पर चंदन से त्रिपुण तिलक करें।
– एक दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करें।
– प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और शिव आरती करें।

चंद्र दोष से मुक्ति का उपाय

मान्यता है कि इस दिन शिवजी को केवल जल अर्पित करने से भी चंद्र ग्रह मज़बूत होता है, जिससे मानसिक तनाव, अस्थिरता, और भावनात्मक परेशानियों से राहत मिलती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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