जालंधर डेस्क। बाबा सोढल मेला पंजाब के जालंधर शहर का एक बहुत प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेला है। यह हर साल भाद्रपद (भादों) महीने की चतुर्दशी को लगता है। इस दिन को अनंत चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही गणेशोत्सव का अंतिम दिन होने के कारण गणेश विसर्जन भी होता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु बाबा सोढल के दर्शन और आशीर्वाद लेने जालंधर पहुंचते हैं।

बाबा सोढल की कथा और मान्यता
मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर आदर्श मुनि तपस्या किया करते थे। बाबा सोढल की माता उनकी सेवा करती थीं। एक दिन मुनि ने माता से कहा – “तुमने मुझसे कभी कुछ नहीं मांगा।” इस पर माता ने उनसे पुत्र की कामना की। मुनि ने ध्यान करके कहा – “तुम्हारे भाग्य में संतान सुख नहीं है।” लेकिन भगवान विष्णु की आराधना करके उन्होंने माता को पुत्र रत्न का वरदान दिया और साथ ही हिदायत दी कि संतान पर कभी गुस्सा मत करना।
बाबा सोढल का प्रकट होना
कुछ समय बाद माता को पुत्र हुआ, जिनका नाम बाबा सोढल रखा गया। जब बाबा सोढल लगभग 5 वर्ष के थे, उनकी मां तालाब पर कपड़े धो रही थीं। बाबा ने मां को परेशान किया तो मां ने गुस्से में डांट दिया। इससे दुखी होकर बाबा सोढल तालाब में समा गए और वहां से नाग (सर्प) के रूप में प्रकट होकर कहा – “मैं हमेशा यहीं रहूंगा और इस स्थान पर जो भी नि:संतान भक्त माथा टेकेंगे, उन्हें संतान सुख मिलेगा।”
सभी भक्तों की मुरादे होती हैं पूरी
करीब 150 साल पहले शुरू हुई बाबा सोढल की मान्यता आज लाखों भक्तों की आस्था बन चुकी है। जब किसी भक्त की मुराद पूरी हो जाती है तो वह अपने बच्चों और रिश्तेदारों को लेकर ढोल-नगाड़ों और नाच-गान के साथ बाबा के दर्शन करने आता है। बाबा सोढल ने आनंद बिरादरी और चड्ढा परिवार को “टोपा” (मट्ठी) चढ़ाने की परंपरा दी।
प्रसाद की विशेषता
-यह प्रसाद केवल चड्ढा और आनंद परिवार के सदस्य ही ग्रहण कर सकते हैं।
-परिवार में जन्मी बेटियां इसे खा सकती हैं।
-लेकिन दामाद और उनके बच्चे इस प्रसाद को नहीं खा सकते, यह वर्जित माना गया है।
पुलिस ने बनाया बेस कैंप, चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी से निगरानी
बाबा सोढल मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जगह-जगह पर बेस कैंप बनाये गये हैं। साथ ही चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। पुलिस ने एक बेस कैंप व अस्थायी कंट्रोल रूम तैयार किया है। वहीं खुफिया विभाग के मुलाजिमों के अलावा सादी वर्दी में महिला फोर्स भी तैनात है।
मेले की खास परंपरा
– मेले के दिन श्रद्धालु पवित्र तालाब से अपने प्रत्येक पुत्र के नाम की 14 बार मिट्टी निकालते हैं।
-घर लौटकर वे इस मिट्टी को अपने घर में बोते हैं जिसे पवित्र खेत्री कहते हैं।
-बाद में इसे मेले के दिन बाबा सोढल के चरणों में अर्पित करके आशीर्वाद लिया जाता है।
जगह-जगह पर लगाये जाते हैं लंगर
मेले के समय पूरे जालंधर में भक्ति और सेवा का माहौल होता है। जगह-जगह, हर थोड़ी दूरी पर सैकड़ों लंगर लगाए जाते हैं। श्रद्धालु प्रेम और आस्था से लंगर तैयार करते और बांटते हैं। जिनकी मन्नतें पूरी हो चुकी होती हैं, वे ढोल की थाप पर नाचते-गाते बाबा के दरबार में पहुंचते हैं।