
Somvati Amavasya 2024: पंचांग अनुसार ‘सोमवार’ आज के दिन को भाद्रपद अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या का मुहूर्त 2 सितंबर की सुबह 05:21 से शुरू होकर अगले दिन की सुबह 07:24 बजे तक रहेगा। इस दिन सुबह और शाम भगवान शिव की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन अभिजित मुहूर्त 11:52am से 12:33 pm तक रहेगा।
सोमवती अमावस्या का पावन पर्व शिव योग में है. इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. सोमवती अमावस्या पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि, मघा नक्षत्र, शिव योग, चतुष्पाद करण, पूर्व का दिशाशूल और सिंह राशि में चंद्रमा है. सोमवती अमावस्या के अवसर पर गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं, उसके बाद पितरों के लिए जल से तर्पण देते हैं. तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं. पितर खुश हो जाते हैं तो पितृ दोष दूर होता है. सोमवती अमावस्या के दिन अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए. वस्त्र से देव और अन्न से पितर एवं ऋषि तृप्त होते हैं. अमवास्या के दिन पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध भी किया जाता है।
सोमवती अमावस्या सौभाग्य प्रदान करता है. इस दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखकर शिव और गौरी की पूजा करती हैं. उसके बाद पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करती हैं. इससे उन्हें सौभाग्य प्राप्त होता है. भाद्रपद अमावस्या की तिथि मंगलवार को सुबह सूर्योदय के बाद तक है. भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं. सोमवार के दिन शिव पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होंगी. जिनके विवाह में देरी हो रही है, वे सोमवार व्रत और शिव पूजा से शादी में आ रही अड़चनों को दूर कर सकते हैं. सोमवार को शिव पूजा से चंद्र दोष दूर होता है. इस दिन आप चावल, दूध, चीनी, सफेद कपड़े आदि का दान कर सकते हैं, इससे चंद्रमा मजबूत होता है।
ऐसे करें पिंडदान
सूर्योदय के समय पिंडदान करना शुभ माना जाता है. इसलिए सूर्य निकलने के बाद पितरों का पिंडदान करने से पहले स्नान कर सफेद रंग के वस्त्र धारण कर लें.
उसके बाद एक स्थान पर तस्वीर स्थापित करें और पितरों को जल अर्पित करें.
फिर गाय का गोबर, आटा, तिल और जौ से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें.
इसके बाद गाय के गोबर से पिंड बनाकर पितरों के नाम का श्राद्ध कर नदी के बहते जल में प्रवाहित करने के बाद ब्राह्मणों को दान दें.
दान की सामग्री में विशेष रूप से काले तिल, जल, दही, शहद, गाय का दूध , गंगाजल, वस्त्र, अन्न, आदि शामिल करें.
पितृदोष निवारण के लिए पिंडदान करते समय मंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें.
सोमवती अमावस्या पर पूजा और जप-तप
सोमवती अमावस्या को भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है. उसके बाद जप-तप और दान-पुण्य करते हैं. इन चीजों को करने से पुण्य प्राप्त होता है.
सोमवार को पड़ने वाली इस अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करना बहुत जरूरी होता है.
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद कच्चे दूध में दही, शहद मिलाकर भगवान शिव जी का अभिषेक करें.
चार मुख वाले दीये को घी से जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें.
इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं के सुहाग पर संकट नहीं आता और वंश वृद्धि होती है.
इसके साथ जरूरी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. बिगड़े हुए काम पूरे होते हैं.
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मेष: दिन शुभ रहेगा...