
Today Hukamnama 10 August 2025 : ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ आसा महला १ छंत घरु ३ ॥ तूं सुणि हरणा कालिआ की वाड़ीऐ राता राम ॥ बिखु फलु मीठा चारि दिन फिरि होवै ताता राम ॥ फिरि होइ ताता खरा माता नाम बिनु परतापए ॥ ओहु जेव साइर देइ लहरी बिजुल जिवै चमकए ॥ हरि बाझु राखा कोइ नाही सोइ तुझहि बिसारिआ ॥ सचु कहै नानकु चेति रे मन मरहि हरणा कालिआ ॥१॥
Today Hukamnama 10 August 2025 अर्थ : अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। राग आसा, घर ३ मैं गुरु नानकदेव जी की बानी छंत। हे काले हिरन! ( हे काले हिरन की तरहें संसार-वन में बे-परवाह हो के दोड़ने वाले मन! तुन (मेरी बात) सुन! तुन इस (जगत) फुलवाड़ी में क्यों मस्त हो रहा है? (इस फुलवाड़ी का) फल जहर है, (भाव आत्मिक मौत पैदा करता है) यह संसार थोड़े दिन ही अच्छा लगता है फिर दुखदाई बन जाता है। जिस मैं तू इतना मस्थई वेह आखिर दुखदाई हो जाता है। परमात्मा के नाम के बिना यह बहुत दुःख देता है। (वेसे भी यह थोडा समां) जैसे समुंदर लहरें मरता है जा जिस प्रकार बिजली चमक मरती है। परमात्मा के नाम के बिना होर कोई (सदा साथ निभाने वाले) रखा नहीं ( हे हिरन की तरह चुन्घी मारने वाले मन!) उस को तू भुलाई बता है। नानक कहता है- हे काले हिरन! हे मन! सदा-थिर रहने वाले परमात्मा को सिमर, नहीं तो (इस जगत फुलवाड़ी में मस्त हो के) तू अपने आत्मिक मौत को बुला लेगा।१।