Last Updated: September 21, 2026

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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 12 अप्रैल 2026

April 12, 2026

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 12 अप्रैल 2026

Today Hukamnama 12 April 2026 अर्थ: धनासरी महला ४ घरु १ चउपदे ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जो हरि सेवहि संत भगत तिन के सभि पाप निवारी ॥ हम ऊपरि किरपा करि सुआमी रखु संगति तुम जु पिआरी ॥१॥ हरि गुण कहि न सकउ बनवारी ॥ हम पापी पाथर नीरि डुबत करि किरपा पाखण हम तारी ॥ रहाउ ॥ जनम जनम के लागे बिखु मोरचा लगि संगति साध सवारी ॥ जिउ कंचनु बैसंतरि ताइओ मलु काटी कटित उतारी ॥२॥ हरि हरि जपनु जपउ दिनु राती जपि हरि हरि हरि उरि धारी ॥ हरि हरि हरि अउखधु जगि पूरा जपि हरि हरि हउमै मारी ॥३॥हरि हरि अगम अगाधि बोधि अपर्मपर पुरख अपारी ॥ जन कउ क्रिपा करहु जगजीवन जन नानक पैज सवारी ॥४॥१॥

Today Hukamnama 12 April 2026 अर्थ: अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा प्राप्त होता है। हे प्रभु ! जो तुम्हारे संत भगत तुम्हारा नाम सुमिरन करते हैं, तुम उनके पूर्व कर्मो के पाप दूर करने वाले हो। हे मालिक प्रभु! हमारे ऊपर भी मेहर कर, (हमें उस) साध संगत में रखो जो तुम्हे प्यारी लगती है।१। हे हरी! हे प्रभु! मैं तेरे गुण बयान नहीं कर सकता। हम जीव पापी हैं, पापों में डूबे रहते हैं, जैसे पत्थर पानी में डूबे रहते हैं। मेहर कर, हम पत्थरों (पत्थर दिलो) को संसार समुंदर से पार कर दो जी।रहाउ। हे भाई! जैसे सोना अग्नि में तापने से उस की सारी मैल कट जाती है, उतार दी जाती है, उसी प्रकार जीवों के अनेकों जन्मो के चिपके हुए पापों का जहर, पापों का जंगाल संगत की शरण आ कर खत्म हो जाता है।२।हे भाई! तभी) मैं (भी) दिन-रात परमात्मा के नाम का जाप जपता हूँ, नाम जप के उसको अपने हृदय में बसाए रखता हूँ। हे भाई! परमात्मा का नाम जगत में ऐसी दवाई है जो अपना असर किए बग़ैर नहीं रहती। यह नाम जप के (अंदर से) अहंकार को खत्म किया जा सकता है।3।हे नानक! (कह:) हे अगम्य (पहुँच से परे)! हे मनुष्यों की समझ से परे! हे परे से परे! हे सर्व व्यापक! हे बेअंत! हे जगत जीवन! अपने दासों पर मेहर कर, और (इस विकारों भरे संसार-समुंदर में से) दासों की इज्जत रख ले।4।1।

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