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Today Hukamnama 21 Aug 2026: हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी

Today Hukamnama 21 Aug 2026

Today Hukamnama 21 Aug 2026

Today Hukamnama 21 Aug 2026: सलोक मः ३ ॥ कामणि तउ सीगारु करि जा पहिलां कंतु मनाए ॥ मतु सेजै कंतु न आवई एवै बिरथा जाए ॥ कामणि पिर मनु मानिआ तउ बणिआ सीगारु ॥ कीआ तउ परवाणु है जा सहु धरे पिआरु ॥ भउ सीगारु तबोल रसु भोजनु भाउ करेइ ॥ तनु मनु सउपे कंत कउ तउ नानक भोगु करेइ ॥१॥मः ३ ॥ काजल फूल त्मबोल रसु ले धन कीआ सीगारु ॥ सेजै कंतु न आइओ एवै भइआ विकारु ॥२॥ मः ३ ॥ धन पिरु एहि न आखीअनि बहनि इकठे होए ॥ एक जोति दुए मूरती धन पिरु कहीऐ सोए ॥३॥ पउड़ी ॥ भै बिनु भगति न होवई नामि न लगै पिआरु ॥ सतिगुरि मिलिऐ भउ ऊपजै भै भाइ रंगु सवारि ॥ तनु मनु रता रंग सिउ हउमै त्रिसना मारि ॥ मनु तनु निरमलु अति सोहणा भेटिआ क्रिसन मुरारि ॥ भउ भाउ सभु तिस दा सो सचु वरतै संसारि ॥९॥

Today Hukamnama 21 Aug 2026 अर्थ-: हे स्त्री! तब श्रृंगार कर जब पहले पति को रिझा ले, (नहीं तो) कहीं ऐसा ना हो कि पति सेज पर आए ही ना और (तेरा किया हुआ) श्रृंगार ऐसे व्यर्थ चला जाए। हे स्त्री! अगर पति का मन मान जाए तो ही किए हुए श्रृंगार को सफल समझ। स्त्री का किया हुआ श्रृंगार तभी कबूल है अगर पति उसको प्यार करे।हे नानक! अगर जीव स्त्री प्रभू के डर (में रहने) को श्रृंगार और पान का रस बनाती है, प्रभू के प्यार को भोजन (भाव, जिंदगी का आधार) बनाती है, और अपना तन मन पति प्रभू के हवाले कर देती है (भाव, पूर्ण तौर पर प्रभू की रजा में चलती है) उसको ही पति-प्रभू मिलता है।1।स्त्री ने सुर्मा, फूल और पान का रस ले के श्रृंगार किया, (पर अगर) पति सेज पर ना आया तो ये (किया हुआ) श्रृंगार बल्कि बेकार हो गया (क्योंकि विछोड़े के कारण ये दुखद हो गया)।2।जो (सिर्फ शारीरिक तौर पर) मिल के बैठैं उन्हें असल पति-पत्नी नहीं कहा जाता, जिनके दोनों जिस्मों में एक ही आत्मा हो जाए (दरअसल) वही असली पत्नी है और असल पति है।3।प्रभू के डर (में रहे) बिना उसकी भक्ति नहीं हो सकती और उसके नाम में प्यार नहीं बन सकता (भाव, उसका नाम प्यारा नहीं लग सकता); ये डर तब ही पैदा होता है अगर गुरू मिले, (इस तरह) डर से प्यार से (भक्ति का) रंग बढ़िया चढ़ता है।(प्रभू के डर और प्यार की सहायता से) अहंकार और तृष्णा को मार के मनुष्य का मन और शरीर (प्रभू की भगती के) रंग से रंगे जाते हैं; प्रभू को मिलके शरीर और मन पवित्र व सुंदर हो जाते हैं।ये डर और प्रेम सब कुछ जिस प्रभू का (बख्शा हुआ मिलता) है वह खुद जगत में (हर जगह) मौजूद है।9।

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