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Today Hukamnama 22 June 2026: हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी

Today Hukamnama 22 June 2026

Today Hukamnama 22 June 2026

Today Hukamnama 22 June 2026: सलोकु मः ३ ॥ गुरमुखि सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥ सबदै सादु न आइओ मरि जनमै वारो वार ॥ मनमुखि अंधु न चेतई कितु आइआ सैसारि ॥ नानक जिन कउ नदरि करे से गुरमुखि लंघे पारि ॥१॥ मः ३ ॥ इको सतिगुरु जागता होरु जगु सूता मोहि पिआसि ॥ सतिगुरु सेवनि जागंनि से जो रते सचि नामि गुणतासि ॥ मनमुखि अंध न चेतनी जनमि मरि होहि बिनासि ॥ नानक गुरमुखि तिनी नामु धिआइआ जिन कंउ धुरि पूरबि लिखिआसि ॥२॥ पउड़ी ॥ हरि नामु हमारा भोजनु छतीह परकार जितु खाइऐ हम कउ त्रिपति भई ॥ हरि नामु हमारा पैनणु जितु फिरि नंगे न होवह होर पैनण की हमारी सरध गई ॥ हरि नामु हमारा वणजु हरि नामु वापारु हरि नामै की हम कंउ सतिगुरि कारकुनी दीई ॥ हरि नामै का हम लेखा लिखिआ सभ जम की अगली काणि गई ॥ हरि का नामु गुरमुखि किनै विरलै धिआइआ जिन कंउ धुरि करमि परापति लिखतु पई ॥१७॥

Today Hukamnama 22 June 2026 अर्थ: जिस ने सतगुरु के संमुख हो कर न सेवा की, न परमात्मा के नाम में उस का प्यार ही लगा, शब्द में रस भी न आया, तो वह बार बार जन्म मरन में रहता है। अगर अँधा मनुख हरी को याद नहीं करता तो संसार में आने का क्या लाभ? हे नानक! जिन मनुखों पर वह मेहर की नजर करता है, वह सतगुरु के संमुख हो कर (संसार सागर से) पार उतरते हैं॥१॥ म: ३ । एक सतगुरु ही सुचेत है,और सारा संसार(माया के)मोह और तृष्णा में सोया हुआ है;जो मनुख सतगुरु की सेवा करते है और गुणों के खजाने हरि के सच्चे नाम में रँगे हुए है,अंधे मनमुख हरि को नही सिमरते,जन्म-मरण के चक्कर में पड़ कर तबाह हो रहे हैं; हे नानक ! गुरु के सन्मुख हो कर केवल उन्होंने नाम सिमरा है,जिन के हृदय में पिछले(किए भले कर्मो के संस्कारों के अनुसार लेख)लिखा हुआ है।२।
पउड़ी ।।हरि का नाम हमारा छत्तीस(36)तरह का(भाव,कई स्वाद वाला) भोजन है,जिस को खा कर हम(माया के पदार्थों से)त्रिप्त हो गए है हरि का नाम ही हमारी पोशाक है जिस को पहन कर कभी भी बे-पर्दा नही होंगे,अन्य और(सुंदर)पोशाक पहनने की हमारी इच्छा दूर हो गई है।हरि का नाम हमारा धंदा,व्यापार है और सतगुरु ने हमे मुख्तिआरी नाम की ही दी है;हरि के नाम का ही हमने लेखा लिखा है,(जिस लेखे से)जम की पहली खुशामद दूर हो गई है।पर किसी विरले गुरमुख ने ही नाम सिमरा है(वही सिमरते हैं)जिन को बख्शीश से(पिछले किए हुए कर्मो के संस्कारों अनुसार उभरे हुए)लेख की प्राप्ति हुई है।१२।

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