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Today Hukamnama 29 July 2026: हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी

Today's Hukamnama 6 Aug 2026

Today's Hukamnama 6 Aug 2026

Today Hukamnama 29 July 2026: बिलावलु ॥ बिदिआ न परउ बादु नही जानउ ॥ हरि गुन कथत सुनत बउरानो ॥१॥ मेरे बाबा मै बउरा सभ खलक सैआनी मै बउरा ॥ मै बिगरिओ बिगरै मति अउरा ॥१॥ रहाउ ॥ आपि न बउरा राम कीओ बउरा ॥ सतिगुरु जारि गइओ भ्रमु मोरा ॥२॥ मै बिगरे अपनी मति खोई ॥ मेरे भरमि भूलउ मति कोई ॥३॥ सो बउरा जो आपु न पछानै ॥ आपु पछानै त एकै जानै ॥४॥ अबहि न माता सु कबहु न माता ॥ कहि कबीर रामै रंगि राता ॥५॥२॥

Today Hukamnama 29 July 2026 अर्थ :- (बहस की खातिर) मैं (आपकी बहस वाली) विद्या नहीं पढ़ता, ना ही मैं (धार्मिक) बहस करनी जानता हूँ (भावार्थ, आत्मिक जीवन के लिए मैं किसी विदवता-भरी धार्मिक चर्चा की जरूरत नहीं समझता) । मैं तो भगवान की सिफ़त-सालाह करने सुनने में मस्त रहता हूँ ।1 । हे प्यारे सज्जन ! (लोकों के अनुसार) मैं कमला / पागल हूँ । लोक सयाने हैं और मैं कमला / मुर्ख हूँ । (लोकों के विचार में) मैं उलटे मार्ग पड़ गया हूँ (क्योंकि मैं अपने गुरु के मार्ग पर चल के भगवान का भजन करता हूँ), (पर लोक अपना ध्यान रखे, इस) कुराहे कोई ना पड़े ।1 ।रहाउ । मैं अपने आप (इस तरह का) मुर्ख नहीं बना, यह तो मुझे मेरे भगवान ने (अपनी भक्ति में जोड़ के) कमला कर दिया है, और मेरे गुरु ने मेरा भ्रम-वहम सब जला दिया है ।2 । (अगर) मैंने भटके हुए ने अपनी समझ गुआ ली है (तो लोगो को भला क्यों मेरा इतना फिक्र है ?) कोई ओर धिर मेरे वाले इस भ्रम में बेशक ना पड़े ।3 । (पर लोकों को यह शंका है कि भगवान की भक्ति करने वाला बंदा पगला होता है) पगला वह बंदा है जो अपने असले की पहचान नहीं करता । जो अपने आप को पहचानता है वह हर जगह एक परमात्मा को बसता जानता है ।4 । कबीर कहते है-परमात्मा के प्यार में रंगीज के जो मनुख इस जीवन में मतवाला नहीं बनता, उस ने कभी भी नहीं बनना (और, वह जीवन अजाईं गंवा जाएगा) ।5 ।2 । शब्द का भावार्थ :-आत्मिक जीवन के लिए किसी चुंच-गिआनता की जरूरत नहीं पड़ती । असली जरूरत यह है कि मनुख अपने असले को पहचान के परमात्मा की भक्ति में रंगा रहे ।

 

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