Today Hukamnama: रागु सूही छंत महला ५ घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ गोबिंद गुण गावण लागे ॥ हरि रंगि अनदिनु जागे ॥ हरि रंगि जागे पाप भागे मिले संत पिआरिआ ॥ गुर चरण लागे भरम भागे काज सगल सवारिआ ॥ सुणि स्रवण बाणी सहजि जाणी हरि नामु जपि वडभागै ॥ बिनवंति नानक सरणि सुआमी जीउ पिंडु प्रभ आगै ॥१॥
अर्थ : राग सूही , घर 2 में गुरु अर्जनदेव जी की बाणी’छंत। अकाल पुरख एक और सतगुरु की द्वारा मिलता है। वह मनुख परमात्मा के गुण गाने लग जाते हैं, परमात्मा के प्रेम-रंग में (टिक कर) वह हर समय (माया के हमलों से) सुचेत रहते हैं, जो मनुख प्यारे गुरु को मिल जाते हैं। (जैसे जैसे) वह प्यारे के रंग में (टिक कर) सुचेत होते हैं, (उन के अंदर से) सारे पाप भाग जाते हैं। जो मनुख गुरु के चरण लगते हैं, उनकी भटकन दूर हो जाती है, उनके सारे काम भी संवर जाते हैं। जो मनुख बड़ी किस्मत से सतगुरु की बाणी कानो से सुन कर परमात्मा का नाम जप कर आत्मिक अदोलता में (टिक कर परमात्मा से) गहरी साँझ बना बना लेता है-वह मनुख मालिक-प्रभु की शरण आ कर अपनी जान अपना सरीर (सब कुछ)परमात्मा के आगे (रख देता है)॥2॥

