Today Hukamnama 6 Nov 2026: गोंड महला ५ ॥ गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंदु ॥ गुरु मेरा पारब्रहमु गुरु भगवंतु ॥ गुरु मेरा देउ अलख अभेउ ॥ सरब पूज चरन गुर सेउ ॥१॥ गुर बिनु अवरु नाही मै थाउ ॥ अनदिनु जपउ गुरू गुर नाउ ॥१॥ रहाउ ॥ गुरु मेरा गिआनु गुरु रिदै धिआनु ॥ गुरु गोपालु पुरखु भगवानु ॥ गुर की सरणि रहउ कर जोरि ॥ गुरू बिना मै नाही होरु ॥२॥ गुरु बोहिथु तारे भव पारि ॥ गुर सेवा जम ते छुटकारि ॥ अंधकार महि गुर मंत्रु उजारा ॥ गुर कै संगि सगल निसतारा ॥३॥ गुरु पूरा पाईऐ वडभागी ॥ गुर की सेवा दूखु न लागी ॥ गुर का सबदु न मेटै कोइ ॥ गुरु नानकु नानकु हरि सोइ ॥४॥७॥९॥
Today Hukamnama 6 Nov 2026 अर्थ : हे भाई! (माया के मोह के घोर अंधकार से बचने के लिए) गुरू के बिना मुझे और कोई जगह नहीं सूझती (जिसका मैं आसरा ले सकूँ। सो) मैं हर वक्त गुरू का नाम जपता हूँ (गुरू की ओट लिए बैठा हूँ)।१। रहाउ। हे भाई! (मेरा) गुरू (गुरू की शरण ही) मेरे वास्ते (देव-) पूजा है, (मेरा) गुरू, गोबिंद (का रूप) है। मेरा गुरू परमात्मा (का रूप) है, गुरू बड़ी ही समर्था का मालिक है। मेरा गुरू उस प्रकाश-रूप प्रभू का रूप है जिसका स्वरूप बयान नहीं किया जा सकता और जिसका भेद पाया नहीं जा सकता। मैं तो उन गुरू-चरणों की शरण पड़ा रहता हूँ जिनको सारी सृष्टि पूजती है।१। हे भाई! गुरू ही मेरे वास्ते धार्मिक चर्चा है, गुरू (सदा मेरे) हृदय में टिका हुआ है, यही मेरी समाधि है। गुरू उस भगवान का रूप है जो सर्व-व्यापक है और सृष्टि का पालनहार है। मैं (अपने) दोनों हाथ जोड़ के (सदा) गुरू की शरण पड़ा रहता हॅूँ। गुरू के बिना मुझे कोई और आसरा नहीं सूझता।२। हे भाई! गुरू जहाज है जो संसार-समुंद्र से पार लंघा लेता है। गुरू की शरण पड़ने से जमों (के डर) से खलासी मिल जाती है। (माया के मोह के) घोर अंधकार में गुरू का उपदेश ही (आत्मिक जीवन का) प्रकाश देता है। गुरू की संगति में रहने से सारे जीवों का पार-उतारा हो जाता है।३। हे भाई! बहुत ही भाग्यों से पूरा गुरू मिलता है। गुरू की शरण पड़ने से कोई दुख छू भी नहीं सकता। (जिस मनुष्य के हृदय में) गुरू का शबद (बस जाए, उसके अंदर से) कोई मनुष्य (आत्मिक जीवन के उजाले को) मिटा नहीं सकता। हे भाई! गुरू नानक उस परमात्मा का रूप है।४।७।९॥

