नई दिल्ली: आज पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू परंपरा में माँ गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य शक्ति माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और पूजा करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
शुभ मुहूर्त
गंगा सप्तमी की तिथि 22 अप्रैल की रात 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 23 अप्रैल की रात 8:49 बजे तक रहेगी।
इस दिन का मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा, जिसे विशेष रूप से शुभ माना गया है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
माँ गंगा को भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि गंगाजल लंबे समय तक शुद्ध बना रहता है और उसमें रोगाणुनाशक गुण भी होते हैं। धार्मिक दृष्टि से, गंगा जल का स्पर्श आत्मा को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
पूजा विधि
गंगा सप्तमी के दिन श्रद्धालु निम्न विधि से पूजा कर सकते हैं:
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
गंगा नदी या जल पात्र में गंगाजल रखकर अर्घ्य दें
“ॐ श्री गंगे नमः” मंत्र का जप करें
दूध, पुष्प, वस्त्र, सुगंधित द्रव्य और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
तिल, फल और अन्न का दान करें
अंत में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देकर पूजा पूर्ण करें
क्या करें इस दिन?
संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करें
गंगा तट पर दीपदान और पूजा करें
पितरों की शांति के लिए तर्पण करें
जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान दें
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, राजा सगर के 60,000 पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। गंगा जल के स्पर्श से सगर पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ, तभी से गंगा को “मोक्षदायिनी” कहा जाता है।
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यदि गंगा स्नान संभव न हो
अगर किसी कारणवश गंगा नदी तक पहुँचना संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करना भी समान रूप से पुण्यदायी माना गया है।
गंगा सप्तमी का यह पावन अवसर आत्मशुद्धि, दान और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, इसलिए श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से माँ गंगा की आराधना करते हैं।