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Darsh Amavasya 2025: आज है दर्श अमावस्या… इस नियम से करें पिंडदान, जरूर करें ये 3 काम, जानें शुभ मुहूर्त

April 27, 2025

Darsh Amavasya 2025: आज है दर्श अमावस्या… इस नियम से करें पिंडदान, जरूर करें ये 3 काम, जानें शुभ मुहूर्त

Vaishakh Darsh Amavasya 2025: आज 27 अप्रैल 2025 को वैशाख माह की दर्श अमावस्या मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। दर्श अमावस्या के दिन विशेष पूजा-पाठ, पितरों का तर्पण और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

दर्श अमावस्या का महत्व:

दर्श अमावस्या का अर्थ है “देखने योग्य अमावस्या”। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु, भगवान शिव और पितरों को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। वैशाख मास की अमावस्या होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह पुण्य और मोक्ष प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है।

आज के दिन जरूर करें ये 3 काम:

1. पितृ तर्पण और जलदान करें:
दर्श अमावस्या पर पितरों को जल अर्पित करने और तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान कर पितरों को जल देना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

2. गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें:
भोजन, वस्त्र, अन्न, जल और दक्षिणा का दान करना इस दिन अत्यधिक फलदायी होता है। मान्यता है कि दर्श अमावस्या पर दान करने से समस्त पापों का नाश होता है और घर में सुख-शांति आती है।

3. भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें:
इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है। व्रत रखकर, तुलसी दल अर्पित कर और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

विशेष सावधानियां:

– दर्श अमावस्या पर नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
– किसी का अपमान न करें और सत्य बोलने का संकल्प लें।
– दिनभर पवित्रता का पालन करें और संभव हो तो व्रत रखें।

कब है दर्श अमावस्या

पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 27 अप्रैल को सुबह 4 बजकर 49 मिनट पर हो रहा है और यह तिथि अगले दिन 28 अप्रैल को सुबह 1 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार अमावस्या 27 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी।

पूजा विधि:

1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
2. घर के पूजा स्थान को स्वच्छ कर दीपक जलाएं और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव का ध्यान करें।
3. तर्पण और पितृ पूजन के लिए जल में तिल, पुष्प और कुशा डालकर पितरों को अर्पण करें।
4. विष्णु सहस्रनाम, शिव चालीसा या गीता का पाठ करें।
5. अन्न, वस्त्र, जल और दक्षिणा का गरीबों एवं ब्राह्मणों को दान करें।
6. दिन भर सकारात्मक विचार रखें और संभव हो तो व्रत का पालन करें।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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