
Vastu Tips For Staircase: घर निर्माण के समय वास्तु शास्त्र का पालन भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। मान्यता है कि पंचतत्वों पर आधारित ये नियम घर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखते हैं और परिवार के जीवन पर सकारात्मक या नकारात्मक असर डाल सकते हैं। बता दें कि घर में सीढ़ियों का निर्माण भी इन्हीं नियमों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील विषय है, क्योंकि सीढ़ियां ऊर्जा के प्रवाह और घर की किस्मत का प्रतीक मानी जाती हैं। आइए जानें कि सीढ़ियां बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…
किस दिशा में बनानी चाहिए सीढ़ियां?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर के भीतर सीढ़ियों की शुरुआत दक्षिण या पश्चिम दिशा से करना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिशाओं में बनी सीढ़ियां समृद्धि, स्थिरता और सौभाग्य को बढ़ावा देती हैं। साथ ही एक और विशेष नियम है सीढ़ियां हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में ऊपर की ओर बढ़ते क्रम में बनवानी चाहिए। पैड़ियों की संख्या भी संतुलित होनी चाहिए और कोशिश हो कि यह संख्या 12 से अधिक न हो।
कहां नहीं बनानी चाहिए सीढ़ियां?
वास्तु शास्त्र में कुछ स्थान सीढ़ियों के लिए वर्जित माने गए हैं। इनमें घर का मुख्य द्वार और ब्रह्मस्थान (घर का केंद्रीय स्थान) शामिल हैं। इन स्थानों पर सीढ़ियां बनने से घर में कलह, तनाव और दुर्भाग्य की संभावना बढ़ने की बात कही जाती है।
सीढ़ियों में गेट लगाने का महत्व
वास्तु के मुताबिक, सीढ़ी के ऊपरी और निचले हिस्से में गेट लगवाना शुभ माना जाता है। हालांकि ध्यान रहे कि ऊपर वाला गेट नीचे वाले से छोटा होना चाहिए। यह ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित रखता है।
सीढ़ियों के नीचे क्या न रखें?
सीढ़ियों के नीचे किचन, बाथरूम, पूजा घर या स्टडी रूम बिल्कुल नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करना बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। यहां तक कि जूते रखने की जगह भी इस क्षेत्र में नहीं होनी चाहिए। यह स्थान हमेशा साफ और खाली रहना चाहिए।
किन दिशाओं में सीढ़ियां बनाना वर्जित है?
उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में सीढ़ियां बनवाने से धन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने का माना जाता है। इसलिए इस दिशा से विशेष रूप से बचने की सलाह दी जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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