Vat Savitri Fasting Rules: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था और श्रद्धा का विशेष पर्व माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा कर कथा सुनती हैं और विधि-विधान से व्रत का पालन करती हैं।
व्रत के दौरान खानपान को लेकर कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि आखिर इस दिन क्या खाना उचित होता है और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए। यहां जानिए व्रत सावित्री व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
बता दें कि वट सावित्री व्रत में हल्का और सादा खाना खाना अच्छा माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन फल खाकर व्रत रखती हैं। आम, तरबूज, खरबूजा और लीची जैसे फल खाने से शरीर को ताकत मिलती है और पानी की कमी भी नहीं होती।
इसके अलावा दूध, दही, मखाने और ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी लाभदायक माना जाता है। कुछ जगहों पर कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाए जाते हैं। गुड़ से बने मीठे पकवान और चने का प्रसाद भी व्रत का हिस्सा होते हैं।
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शरीर को हाइड्रेट रखना क्यों जरूरी?
अगर आप निर्जला या लंबा उपवास कर रही हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। नारियल पानी, दूध और ताजे फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और थकान कम करने में मदद करता है।
इन चीजों से रखें दूरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। प्याज, लहसुन, मांसाहार और शराब जैसी चीजों का सेवन वर्जित माना जाता है। कई लोग व्रत में सामान्य नमक और चावल भी नहीं खाते।
व्रत से पहले कैसा हो आहार?
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी व्रत से पहले हल्का और पाचन योग्य भोजन करना शरीर के लिए बेहतर होता है। बहुत अधिक तला-भुना या मसालेदार खाना अगले दिन कमजोरी और एसिडिटी की वजह बन सकता है। इसलिए व्रत से पहले सादा भोजन लेना फायदेमंद रहता है।
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वट वृक्ष की पूजा का महत्व
हिंदू परंपरा में बरगद के पेड़ को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर परिवार की खुशहाली और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार देवी सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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