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Vikata Sankashti Chaturthi: आज मनाई जा रही है विकट संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा और महत्व

Vikata Sankashti Chaturthi

Vikata Sankashti Chaturthi

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। बता दें कि यह दिन भगवान गणेश के विकट स्वरूप को समर्पित होता है, जिनकी पूजा विशेष रूप से जीवन के संकटों को दूर करने के लिए की जाती है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर विधि-विधान से गणपति की आराधना करते हैं। चलिए जानते हैं विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे की जाती है…

तिथि और समय

पंचांग के मुताबिक चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11:59 बजे शुरू हुई थी और 6 अप्रैल को दोपहर 2:10 बजे समाप्त होगी। इसी आधार पर आज व्रत रखा जा रहा है।

पूजा के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:56 से 5:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:16 से 1:06 बजे तक
इन समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।

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चंद्रोदय का समय

आज चंद्रमा रात 9:54 बजे उदित होगा। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण किया जाता है, इसलिए इस समय का विशेष महत्व है।

व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का विकट रूप भक्तों को भय, रोग, शोक और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन की गई पूजा से साहस, सफलता और निडरता की प्राप्ति होती है।

इस विधि से करें पूजा

आज विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और साफ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

गणेश जी को जल से स्नान कराकर सिंदूर, अक्षत, दूर्वा और फूल अर्पित करें। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और दीप-धूप जलाकर आरती करें।

रात में चंद्र दर्शन के बाद दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें और प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।

धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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पूजा में बोले जाने वाले मंत्र

“श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ…”
“ॐ गं गणपतये नमः”
“ॐ वक्रतुण्डाय हुम्”

इन मंत्रों के जाप से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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